Saturday, December 2, 2023

जँ ने अप्पन छाप छोड़लौं

जन्म लए लाखो-करोड़ो निरर्थक चलि जाइछ जगसँ । जँ ने अप्पन छाप छोडलौं जीबिएक' कथी कएलौं!! जनमि जगमे लोकसब जीबैछ अपने लेल अइठाँ । जँ ने अनकर नोर पोछलौं जीबिएक' कथी कएलौं !! हँसय-बाजय खूब मस्ती करै अछि सब लोक जगमे । दीन-हीनक मुख ने मुस्की- लाबि सकलौं, तँ की जीलौं!! काम भय आहार निद्रा पशु-मनुज दुहुँमे एके रंग । धर्म टा सुविशेष मनुखक पशुवते जीक' की जीलौं!! कथी लेल भेल जन्म बिसरल व्यसनमे डूबल रहै छी । आत्मज्ञानक लाभ नै तँ जन्म लइएक' की केलौं!!! ****************************

Thursday, November 30, 2023

नेत्र

नेत्र द्वय तँ भेटल सबके एके रंग नै दृष्टि सबहक । किछु गोटे स्थूल देखथि शूक्ष्ममे डूबल थोड़े छथि ।। मूल्य समयक के चुकायत अमूल्ये एकरा बुझू । बीति गेल जे क्षण, जगक- सबटा धनो नै घुमा सकता ।। शास्त्र के विद्वान यद्यपि मूर्ख तैयो रहि सकै अछि । जे क्रियामे सेहो उत्तम सैह सबसँ पैघ पंडित ।। जदपि वाणी शास्त्रपूरित मोन पापेमे रमल छै । गिद्ध नभमे उड़य ऊँचे दृष्टि मुर्दे पर गड़ल छै ।। समय होबय अमुल, एकरा व्यर्थमे जे क्यो गमयता । घुरि ने लौटय एकोटा क्षण जीवने बरबाद करता ।। बनि ने सकलहुँ महादानी, लोक सेवाके के रोकत? भले नै तरुवर फड़ल के रोकि सकता छाँहके ।। बिलाड़ियो-कुकुरो आ नढ़ियो जगमे अपना लेल जीबय । व्यर्थ बूझी तकर जिनगी जे ने अनका लेल जीबय ।। ******??*************?***

Tuesday, November 28, 2023

आगाँ-पाछाँ

एके सागर केर नाविक कियो अति प्राचीन छथि । कियो नवसिखुआ एतय तँ कियो अर्वाचीन छथि ।। देखिक' चिंता करू नहिं फलाँ बढि गेल बहुत आगाँ । जखन घुरती काल देखब छूटि जायत बहुत पाछाँ ।। ठाढ़ सैन्य परेड मे छथि सकल सैनिक, किछु गोटे छथि अंत तँ किछु आदि छथि । 'मुडू पाछाँ' होइत अछि आदेश जखनहिं, जे छला अन्तिम से से बनि गेल आदि छथि ।। अहं जुनि क्यो करी हम छी बहुत आगाँ, गम कियो नहिं करथु जँ भ' गेलहुँ पाछाँ । काल के गति शूक्ष्म हिनका क्यो ने जानय, की पता आदेश हो 'मुड़ि जाउ पाछाँ' ।। विपति गिरि सम होय यद्यपि मुदा सदिखन धैर्य राखू, आश ईशक धरू सबदिन कुपथ पर नहिं डे'ग राखू । धैर्यपूर्वक शांत चित्तें दिवस के फेरी के दे'खू, नीक दिन आयत जरूरे सुपथ पर नित डे'ग राखू ।। ***********************

पूजा-पाठ

जरूरी नै सतत पूजे- पाठमे लागल रही । रही जँ उपकार रत तँ सैह पूजा-पाठ थिक ।। सतत चिन्तन भूत वा ने भविष्येमे रही लागल । वर्तमानेमे रही जँ तँ सैह सबसँ नीक थिक ।। जुनि बुझी अन्हर-बिहाड़िक कुप्रभावे हो सतत । सतर्को राखैछ सबके, मार्गके साफो करय ।। विफलता सँ जुनि कनिकबो निराशाके भाव आबय । "आर कसगर प्रयासक अछि जरूरति" हो सोच मनमे ।। जुनि करी अनकर प्रतीक्षा अपन पैरुख तक लड़ी । हृदयमे धरि ईशके, भिड़ने सफलता भेटय निश्चय ।। **************???***??

Monday, November 27, 2023

दिव्यलोकक संग

दिव्यलोकक संग नै ऐ लेल जे किछु पाबि ली हम । लाभ एतबा बुझि पड़य हमरो सनक जन सुधरि जाइ अछि ।। जीवनक सौंदर्य ई नहि अहाँ कतबा खुश रहै छी । अछि असल सौंदर्य जे अछि लोक कतबा खुश अहाँसँ ।। आगमन आ गमन अहिना जगतमे लागल रहै छै । देलनि आहुति जगत लेल जे सैह मुइलो पर जिबै छथि ।। खन उदासी खन खुशी खन हो पराजय विजय कखनो । सड़क जिनगी केर अहिना मंद गतिएँ अंत होमय ।। बाह्य भौतिक सुख क्षणिक थिक असल थिक अंतःकरण सुख । बाह्य सुख तँ सुखे नै थिक दुख भरल सुखरूप थिक ई ।। ***************************??

Saturday, November 25, 2023

अनकर दोख नै देखी

बोल कोइली केर होमय सकल पक्षी मध्य सुंदर, रूप जँ कारी ने होइतय तखन होइतय आर उत्तम । उदधि छथि आश्रय सगर जलजीव के संसार मे, जँ ने खारा अम्बु होइतय तखन होइतय आर उत्तम । अति सुगन्धित होइत अछि सबटा गुलाबक फूल जगमे, काँट जँ बिल्कुल ने होइतय तखन होइतय आर उत्तम । मनुख थिक गुण-खान राजा जीवगणके ऐ जगत मे, जँ ने अनकर दोख देखितय तखन होइतय आर उत्तम । ***********************

स्विच ऑफ मोबाइल

बात थोड़े पुरान थिक । तै समयमे हम राँचीमे रहैत छलहुँ । हम डोरंडामे छलहुँ आ हमर एकटा मित्र कडरूमे रहैत छलाह । ओ हरदम हमरा डेरा पर अबैत रहैत छलाह । चाह-पान-नश्ता हाहा-हीही खूब होइत छलैक । मुदा हमरा हुनका डेरा दिस जयबाक सुयोग नहि भेटल छल । एक दिन अशोकनगरमे काज छल तैं दुनू बेकती कडरू होइत गुजरि रहल छलहुँ । मित्र याद आबि गेलाह । फोन केलियन्हि तँ हुनक कनियाँ उठेली । कहलियन्हि जे लौटैत काल अहाँक डेरा पर आयब । अशोकनगरमे बहुत विलम्ब भ' गेल तैं घुरैत काल हुनका डेरा पर जयबामे मोन असकता रहल छल । अपन असमर्थता व्यक्त करबा लेल दोस्त के मोबाइल पर फोन लगेलहुँ मुदा नहि लागल । हुनकर कनियोंक मोबाइल पर नहि लागल । डेरा पर आबि अपसोच भेल जे दोस्त के नहि कहि सकलियनि, ओ व्यर्थमे बाट तकैत हेताह । श्रीमतीजी अनका मोनक बात जान'मे बड्ड आगाँ छथि । बाजि उठली- " कत' छी बमभोला बाबा! कियोने आहाँक बाट तकैत हेताह । एतबो ने बुझलियैक जे अहीं दुआरे दुनू मोबाइल स्विचऑफ छलैक!" हम अबाक!!!! ***********************