Thursday, May 16, 2019

करमौली ग्राम-गाथा (2)


               
                   विषय अनुक्रमणिका :-
1.     भूमिका                                    पृ० सं० 1-5
2.     ग्राम-बासक वर्णन-
3.     चौपाड़ि एवं ब्रह्मबाबा
4.     डिहबारबाबा
5.     ब्रह्मचर्याश्रम
6.     माध्यमिक विद्यालय
7.     फिल्ड
8.     नवाह
9.     दुर्गा-पूजा 
10.                         ख़बासक पोखरि
11.                        बाबा पोखरि
12.                         ग्राम्य-हाट
13.                         विशिष्ट व्यक्तित्व
14.                         उपसंहार   










2. ग्राम-बासक वर्णन :-

i. ब्राह्मण:-
एक स्थूल आकलन सँ अनुमानतः लगभग 200 बर्ख़ पूर्व ऐ गाम मे पहिल व्यक्ति बसल छलाह जे डीही भेलाह I तकर बाद ब्याह-सम्बन्ध सँ भगिनमान सब बसलाह I किछु व्यक्ति स्वतंत्र रूपें सेहो आबिक’ बसलाह जिनकर वंशज सब एखन देखना अबैत छथि जे किनको भगिनमान नहिं छथि I  
प्राचीन काल मे ऐ स्थान पर घनघोर बोन रहल होयत I ऐ बोन मे बाघ-सिंह सहित आरो जीव-जन्तु सब रहल होयत I ई तथ्य ऐ बात सँ सिद्ध होइछ जे ग्राम-डिहबार नरभक्षी बाघ के मारने छलाह आ बाघो हुनका मारि देने छलनि I हाल-हाल तक गामक चारूकात घनघोर बोन छल I बीच गामो मे कैकटा सघन बोन-झाँखुर हमरो सबहक ज्ञान मे छल, किछु अवशेष एखनो देख’ मे अबैछ I      
संभवतः नरभक्षी के मरि गेलाक उपरांत सबसँ पहिले ओइनबार-ओइनी वंशक लोक ऐठाम आबिक’ बसलाह I ई लोकनि डीही कहाबैत छथि I हुनकर बास वर्त्तमान मे गामक सबसँ उत्तर मे छन्हि I डीहीक एखनुक लोक सबके देखला सँ मात्र तीन पट्टीदारक वंशज दृष्टिगोचर होइत छथि I शायद हंसपति ठाकुर वा हुनक एक-दू पीढ़ी ऊपर के व्यक्ति जिनका एके सन्तान भेल छल हेतनि ऐ ठाम आयल छल हेताह I ओना एखनुक पटीदार सब हंसपति ठाकुरे सँ फूटल बुझाइछ I
हंसपति ठाकुर के चारि पुत्र छलनि- सबसँ ज्येष्ठ बाबूजी ठाकुर जिनका पाँच पुत्र छलनि, द्वितीय पुत्र सिंहेश्वर ठाकुर जे कुमारे अवस्था मे काल-कवलित भ’ गेलाह, तृतीय पुत्र किशोरी ठाकुर जिनका तीन पुत्र छलनि आ सबसँ छोट लक्ष्मीदत्त ठाकुर जिनका दू पुत्र छलनि I
डीही ओइनबार-ओइनीक भगिनमान दिघवे सब छथि I हुनकर जनसंख्या बहुत बेसी कहक चाही, बीच गाम मे आ पुबारी भाग मे सेहो बहुत लोक छथि I दिघवेक भगिनमान एकहरे सब छथि I ई सब गाम मे सबसँ बेसी छथि I उत्तर-पूब कोन मे आ गामक दक्षिण मे ई सब छथि I एकहरेक भगिनमान सदरपुरिए सब छथि I हिनको सबहक संख्या बड्ड बेसी कहाक चाही I गामक दक्षिण-पश्चिम भाग मे आ ओइसँ पश्चिम दक्षिण भाग मे ई सब बसल छथि I
एकर अतिरिक्त स्वतंत्र रूपें बसल लोक सब मे आशेश्वर झाक परिवार, भागीरथ जीक परिवार, सत्यनारायण ठाकुर(सरकार)क परिवार, दशरथ जीक परिवार एवं किछु आर लोक सब छथि I ब्राह्मणक क़रीब 500 घर हेतनि I
ii. अमात :-
गामक पश्चिम भाग मे सड़क के पूब आ पश्चिम अमात सब बसल छथि I हिनकर पूर्वज लक्ष्मण ख़बास दड़िभंगा राज मे टहलू छलाह I महाराज रामेश्वर सिंह हिनका बड्ड मानैत छलथिन्ह I ईहो पूर्ण समर्पित भाव सँ हुनकर सेवा मे लागल रहैत छलाह I महाराजक कोनो शत्रु के ई मारि देलनि जाहिसँ महाराज बहुत प्रसन्न भेलथिंह I राजक कृपा सँ हिनका खूब संपत्ति प्राप्त भेल छलनि I दक्षिण भागक च’र करमौली सँ डोकहर तक 1100 एकड़ हिनके छलनि I सात-आठ बिगहा मे तँ हिनकर बासे हेतनि I एकर अतिरिक्त गामक उत्तर मे गोरहा, गाछी सब बहुत छन्हि I गामक पहिल विशाल पोखरि “खबासक पोखरि” हिनके कीर्ति छन्हि I अही पोखरिक उतरबरिया भीर पर ब्रह्मस्थान अछि जतय एकसठि बर्ख़ सँ नओ दिनक नवाह संकीर्तन होइछ I अन्य तीनू भीर पर लोकसब बसल छथि I ब्राह्मणक बाद जनसंख्या मे अमाते सब छथि I ई सब क़रीब 50 घर हेताह I

iii. कुम्हार :-
डीही सबहक सटले पश्चिम कुम्हार सब छथि I पूर्व मे हिनकर सबहक मुख्य कार्य बरतन बनेनाइ छलनि I आबा मे सुराही, घैल, तौला, ढाकन, सरबा, मटकूर, मटकूरी, चुक्की, खौर, छठिक हाथी, खापैर, दिबारी...इत्यादि पकाक’ वियाह, उपनयन, एकादशी यज्ञ, दिया-बाती, छैठ आदि सुअवसर पर दैत छलाह आ संगहिं हाट-बजार मे सेहो बेचैत छलाह I आब ओहो सब नोकरी-चाकरी मे लागि गेलाह अछि आ बरतन-बासन मे  नगण्य लोक लागल छथि I पूर्व मे ततेक प्रेम-भाव छल जे ब्राह्मण घरक उपनयनक बरुआ सबके उपनयन सँ पूर्व कुम्हार सबहक घर मे निमंत्रण पड़ैत छल I एखनहुँ निमंत्रण पड़ैत अछि मुदा दोसर रूप मे, मात्र पूरी-तरकारीक भोज देल जाइछ I कुम्हार सबहक क़रीब 25 घर होयत I

iv. हलुआइ :-    
गामक पश्चिम भाग मे सड़क सँ पश्चिम भाग मे हलुआइ सबहक घर छन्हि I पहिले हिनकर महिला सब कंसार लगबैत छलीह, मर्द सब खेती-बारी करैत छलाह I आब कंसार प्रायः समाप्त भ’ चुकल अछि I हलुआइ सब नोकरी-चाकरी आदि मे लागि गेल छथि, खेती आ कंसार छुटि गेल छन्हि I



v. हज़ाम :-
 पहिले गामक सबसँ पश्चिम भाग मे तीन घर हजामक छल I आब वैह सब बढ़िक’ पाँच-छ’ घर भ’ गेल अछि I बतहू, भागवत, कारी ठाकुर सब नामी रहथि, बतहू आ भागवत तँ स्वर्गवासी भ’ गेलाह, कारी ठाकुर एखनो छथि I बतहू ठाकुर के कम सुझैत छलैक मुदा तैयो लोक डेराइतो-डेराइतो केस-दाढ़ी बनबा लैत छल I   


vi. तेली :-
पूर्व मे दू घर तेलीक छलन्हि, आब एक-दू घर आर बढ़ि गेल छन्हि I पहिले ई सब कोल्हु चलबैत छलाह I बड़दक आँखि मे पट्टी बान्हल रहैक छलैक I बीच मे उक्खड़ि रहैत छलैक, ओइ मे खेतक उपजल सरिसो द’ देल जाइत छलैक I उक्खड़िक बीच मे समाठ रहैत छलैक I समाठ के बाँस द्वारा बड़दक गर्दनि मे बान्हि देल जाइत छलैक I बड़द के घुमला सँ सरिसो पेड़ाइत छलैक, खैर एक दिस आ तेल दोसर दिस खसैत छलैक I ग्रामीण इंजीनिअरीक नीक उदाहरण कहक चाही I एकरा जोगाड़ टेक्नोलोजी कहि सकैत छी I वाल्यावस्था मे हम सब कोल्हु देख’ जाइत छलहुँ आ बड़ी-बड़ी काल धरि देखैत रहैत छलहुँ I बड़दक आँखि पर पट्टी घुरमी नै लागैक तैं बान्हि दैत जैत छलैक I तेली सबहक घर हजाम सबहक सटले दक्षिण छलन्हि I




vii. चमार :-
गामक पश्चिमे भाग मे हजाम सबसँ किछुए उत्तर दस घर चमारक छल I आब पंद्रह–बीस घर भ’ गेल छथि I हिनकर सबहक मुख्य व्यवसाय खेतिए कहक चाही I ओना कोनो माल-जाल, कूकुर आदि मरि गेला पर यैह सब ओकरा हटाबैत छथि, ई सब स्वच्छताक सूत्रधार छथि I हिनकर सबहक काज बहुत प्रशंसनीय छन्हि I जँ ई सब नहिं रहितथि तँ गाम घिनायल रहितय आ रहब बहुत दुरूह होइत I

viii. लोहार :-
मात्र एक घर लोहारक छल, सेबैत लोहार I हुनकर एक मात्र पुत्र तिलक ठाकुर हमर बचपन के संगी छथि I एखनो एके घर कहक चाही I हँ, आब तिलक ठाकुर के दू-तीन पुत्र छन्हि मुदा सब बाहरे छन्हि, तैं एके घर अछि I हिनकर घर अमात सबहक बीचे मे आर.डब्ल्यू.डी. सड़क सँ पश्चिम मे छन्हि I

ix. यादव :-   
पहिले यादव सब गुल्टेनी झा पोखरिक पुबरिया महार पर बसल छलाह I लगभग बीस घर छलाह I आब ई सब धधहरा गाछी मे सड़क सँ पश्चिम बसि गेलाह अछि I विजय यादव के नाम पर टोलक नाम विजयपुर राखैत गेलाह I हुनका सबहक लेल नीके भेलनि I पुरना बास बड्ड कंजस्टेड छलनि, नबका मेन रोड पर खूब ऐल-फ़ैल बास! पुरना बासक जमीन घरारी के महाग भाव मे बिकेलनि I नबका बास हुनका सबके खेतीक जमीन आ गाछी छलनि I अगल-बगल के जमीन जे हुनका लेल महग घरारी छन्हि सस्ता मे धनहर खेतक भाव भेटलनि आ एखनो भेटि रहल छन्हि I गाछीक आमक लाभ सेहो भेलनि I नोकरी-चाकरी, दूध-व्यवसाय, खेती आदि मे समर्पित ई सब खूब सुखी संपन्न भ’ गेल छथि I





Saturday, May 11, 2019

करमौली ग्राम-गाथा (1)


ओम् श्री गणेशाय नमः I नमो भगवत्यै माता सरस्वत्यै नमः I नमो भगवते श्री रमणाय I                           
करमौली ग्राम-गाथा :-
 भूमिका :-                               
ग्रामक डिहबार आ ब्रह्म बाबा के नमन क’ क’ आइ ‘करमौली ग्राम-गाथा’ पुस्तक लीखब प्रारम्भ क’ रहल छी I जते संभव होयत गामक प्रत्येक प्रमुख स्थान, एक-एक विशेष घटना, एक-एक विशेष व्यक्तित्वक वर्णन करबाक प्रयास करब जाहि सँ गाम आ बाहरो के लोक सब हमरा गाम सँ सुपरिचित भ’ सकताह I गामक डीह, ब्रह्म-स्थान, डिहबार-स्थान, ब्रह्मचर्याश्रम, दुर्गा-मंदिर आ दुर्गा-पूजा, गुरुजी, विद्यानंद काका, पठशल्ला, फिल्ड, हाटक गाछी, खबासक पोखरि, बाबा-पोखरि, ककरियाही, धधहर आ धधहरा गाछी, धधहरा गाछीक इनार, धधहर परहक इनार, फिल्ड मे फुटबौलक खेल, गामक प्रख्यात विद्वान् आ अन्य क्षेत्रक ख्यातिप्राप्त व्यक्तित्व सबहक वर्णन ऐ पुस्तक मे करबाक मोन अछि I बूढ़-पुरान लोक सबहक संस्मरण बहुत लाभदायक होयत I अपन अनुभव आ अनुभवी व्यक्ति सबहक बहुमूल्य सुझावक आधार पर लीखल ई पुस्तक अपना प्रयास मे कतेक सफल भेल ई पाठके सब कहि सकैत छथि I
बाल्यकालक बाद हाइ-इस्कूल तक गाम सँ पूर्ण रूपेण जुरल रहलहुँ, मुदा उच्च अध्ययन लेल जखन दड़िभंगा सी.एम. कॉलेज मे पड़ह’ गेलहुँ तँ संपर्क थोड़ेक घटि गेल I गर्मी-छुट्टी, दुर्गापूजा छुट्टी आ काजतिहारे मे एनाइ सम्भव भ’ पबैत छल I फेर जखन अभियन्त्रण अध्ययन लेल सिन्दरी चलि गेलहुँ तँ सम्पर्क थोड़े आर घटि गेल I बादक दिन मे नोकरी मे लागि गेला संताँ छुट्टीक अभाव मे एनाइ-गेनाइ आर बेसी घटि गेल I अवकाशग्रहणक पश्चात् आब थोड़े बेसी संपर्क बड़हल अछि I गाम अबैत देरी मोन उत्फुल्ल भ’ उठैत अछि I बाल्यकालक संस्मरण मोन के जीवन्त कदैछ I दरबज्जा परहक बाबा पोखरि मे आ चौपारि परहक खबासक पोखरि मे घंटों हेलबाक आनंद एखनहुँ मोन मे ओहिना रचल-बसल अछि I दुनू पोखरि आ ककरियाहीक खत्ता मे जखन उजाहि उठैत छलैक तँ सगर गामक आबालवृद्ध माछ मारक लेल धमगज्जर केने रहैत छलाह I जूरसितलक सुअवसर पर ख़बासक पोखरि मे दुनू टोलक लोक पैसि एक-दोसरा पर जल फेकि जावत्काल तक हरदा नै बजबा लैत छलाह तावत्काल तक जान नहिं छोड़ैत छलाह I फेर जल सँ निकलि दुनू टोलक युवा लोकनिक बीच कुस्ती-कुस्ती होइत छल I बच्चा सबहक लेल ई अत्यधिक रोमांचक होइत छल I असली प्रतियोगिता जेकाँ बुझाइत छल I जल-प्रतियोगिता मे आँखि लाल-लाल भजाइत छल I
कलम-गाछीक टाइल-पुल्ली, कबडी-कबडी, बुढ़िया-कबडी, चुनौती-कबडीक आनन्द वर्णनातीत अछि I पठशल्लाक फिल्ड मे साँझखनक गेंदक खेल नामी छल I बेसीकाल इलाका भरिक गामक फुटबॉल टीम टुर्नामेंट मे भाग लैत छल I ताहि समयक रोमान्च एखनो रोमांचित करैछ I नबाहक नौ दिनक रामधुन मे सम्पूर्ण गाम राममय रहैत छल I ब्रह्म आ डिहबार पूजाक अवसर पर सम्पूर्ण गाम आह्लादित रहैत छल I दुर्गापूजा तँ हमरा सबके अति विशेष उत्साह दैत छल I दसो दिन-राति हमसब पठशल्ले पर बितबैत छलहुँ I पूजाक आनंदक संग-संग गुरुजीक अमृतोपम सान्निध्य पाबि कृत-कृत्य रहैत छलहुँ I
एखनुक गाम एकदम बदलि गेल अछि I हर-बरद, गाय-महींस, दूध-दही, साग-सब्जी, नाटक-रामलीला, यज्ञ-जप, भगवत्कथा-प्रवचन, पारम्परिक खेल-कूद, वेदपाठ-संध्यावन्दन-गायत्री जप-तर्पण, पराती, घूर तरहक गप्प-सप्प, पाहुन-परख के स्वागत-सत्कार ... आदि सबटा लोप भ’ रहल अछि I अही परिप्रेक्ष्य मे बहुत पूर्व अपन एक गोट लिखल कविता अंकित करबाक लोभ सम्बरण नहिं क’ पाबि रहल छी-
“ गाम मे ब'रद एको नै
धेनु बांचलि नाम मात्रे ।
'र-पालो भूतकालक
महिष सेहो नाम मात्रे ।।

दूध के लेल सुधा डेरी
दही, घी लेल वैह आशा ।
साग-सब्जी हाट पर स'
आन सब शहरेक आशा II

रामलीला ख़तम भ' गेल
नाटकक नै नाम कत्तहु ।
मनोरंजन करय टीभी
यज्ञ के नै नाम कत्तहु ।।

जूरसितलक पानि संगहि
मल्ल-युद्धो बिला गेलै ।
गामघरक टाइल-पुल्ली
संगहि कबडी बिला गेलै ।।

पंडितक प्रवचन कतहु नै
वेद के पाठो विदा भेल ।
बंद भेल संध्याक वंदन
गायत्री, तर्पण विला भेल ।।

पराती गायन विला गेल
घूर-गप नामो ने सूनी ।
दलानो अंगना मे सटिगेल
पाहुनक नामो ने सूनी ।। “

गामक आजुक हालति एकदम बदलि गेल अछि I पहिले पण्डितक गाम रहबाक कारणें वेद-पाठ, श्लोक-स्तोत्र पाठ, भजन-कीर्तन, यज्ञ-जाप-पूजा-पाठ आठो पहर सुनबा मे अबैत छल I तीन बजे भोरे मे ब्रह्मलीन वैदिक मुक्तिनाथ जी स्नान करबा लेल बाबा पोखरि अबैत छलाह, हुनके हरिनाम पर छात्र सब भोरे सँ नित्यक्रिया सँ निवृत्त भए स्वाध्याय मे लागि जाइत छलाह I भोरू परहक समय मे बूढ़ सबहक पराती सँ गाम गुन्जायित भ’ जाइत छल I महिंसबार सब अन्हरोखे मे महींस चराबक लेल झुंड मे निकलैत छलाह, इनार सँ जल लाबक हेतु पनिभरनीक यूथ निकलैत छली, इनार-पोखरि पर भीड़ जुटि जाइत छल, बटुक सब विद्यालय पर वेद-पाठ शुरू करैत छलाह,  चौपारि पर मंदिर मे घड़ी-घंट बाज’ लागैत छल, किसान-मजदूर-हरबाह सब हर-बरद-कोदारि-खुरपीक संग खेत दिस विदा भ’ जाइत छल, सम्पूर्ण गाम मे चहल-पहल शुरू भ’ जाइत छल I भोरू परहक ऐ दृश्यक वर्णन के क’ सकैत अछि ! भरिदिन इस्कुल-विद्यालय मे शास्त्र-चर्चाक उपरांत साँझखन फिल्ड मे फुटबॉलक दृश्य अद्भुत रहैत छल I गामक झगड़ा-झाँटी गामे के पञ्चायत मे फ़रिया लेल जाइत छल, मोकदमा-फौजदारीक नामो नै छल I सम्पूर्ण गाम मे शान्तिक वातावरण छल I
अही प्रसंग पर हम किछु बर्ख़ पूर्व अपन लीखल कविता नीचा द’ रहल छी-
    

  
 कियो लौटा दै हौ हमर पुरना गाम,                                        
 वेद धुनि गुंजित जहँ भोर-साँझ हरिनाम I                                 
 गढ़ संस्कृतक विख्यात परोपट्टा मे
 यग्य-जाप-पाठ-पूजा होइ छल अष्टयाम II

  अन्हरोखे तीन बजे नहाय लेल पोखरि मे,                                 
 वैदिक जी आबथि तहमहूँ सब ऊठि जाइ I                           
  नित्य क्रिया जल्दी कडिबिया जराबी झट,                              
 पुस्तक आ कापी लपड़हक लेल बैसि जाइ II

 भोरुका पहर मे जोर सपढिअइ त’,                               
 टोलभरिक छौंड़ा सब सेहो ऊठि जाइत छल I                            
 सबहक़ दरबज्जा पर लालटेम जरैत छलैक,                               
 बच्चाक मधुर धुनि सगाम गुंजाइत छल II

 ओमहर पछबारि भाग बूढ़ सब जगला त’,                                
 भोरुका पराती स' युवक सबहक निन्न टुटल I                                 
 युवक महिसबार सब दौड़ल खरहोरि दिस,                               
 माथ पर घैल संग नारिक यूथ कूप जुटल II

 बटुकगण विद्यालय मे भोरे भोर स्नान क',                               
वेदपाठ-सस्वर सब उच्चस्वर मे करै छल I                                   
लोक सब रस्ता पर सुनबा लेल ठाढ़ छथि,                            
भोरुका अइ दृश्यक के वर्णन कसकै छल II


दिन भरि विद्यालय मे गुरूजी पढ़बै छथि,                               
उद्भट विद्वान्  सब यूथक यूथ आबै छल I                            
गुरुजीक सेवे मे मेवा सब पाबि रहल,                                   
हंसी खेल करिते सब विद्या के लाभै छल II

 बेरखन लोक सब जूटल विद्यालय पर,                                   
गुरूजी लग शास्त्र चर्चा विद्वद्गण करहल I                          
 फिल्ड मे बच्चा सब रमल अछि गेंद मे,                                  
 कृषकगण के ग्रुप मे कृषि चर्चा भरहल II

 साँझखन कखेतिहर सब जुटला चौपाड़ि पर,                             
 घंटा दू घंटा धरि कीर्तन अछि भरहल I                                  
 छात्र दरबज्जा पर पुस्तक आ कापी लय,                               
 टास्क इस्कूलक तैयारी सब करहल II

झंझट भेल कोनो तबाबा दरबज्जा पर,                                     
गाम भरिक लोक बैसि निर्णय करैत छल I                                 
क्षण मे समाधान भेल जाउ सब निश्चिन्त रहू ,                           
केस आ मोकदमा के क्यो नामो ने सुनैत छल II

शान्ति आ प्रेमक सन्देश पसरय चारूदिस
परोपट्टा मे गाम केर डंका बजैत छल I                                    
बाट आ बटोही जे गुजरय अहि गाम द’,                              
करनिज मौलि छूक' चर्चा करैत छल I                            
 ...................................चर्चा करैत छल II 

 उपर्युक्त पूर्वकालक गामक गरिमा-वर्णन अपने सब सुनलहुँ मुदा एखनुक गामक हाल बेहाल भ’ गेल अछि I लोक सब मे आपस मे प्रेमक बदला घिरना भरि गेल छैक, सौंसे कलह पसरल छैक I युवावर्ग व्यसन मे मस्त अछि I पूजा-पाठ लुप्तप्राय भ’ गेल, धर्मक दिबाला निकलि गेलैक, अधिकांश लोक नशा आ पापकर्म मे डूबल रहैछ I लोकक संस्कार क्षीण भ’ गेलैक, श्रेष्ठक प्रति आदर आ छोटक प्रति स्नेह समाप्त भ’ गेलैक I धीया-पुता सब पढ़ाइ-लिखाइ छोड़ि मोबाइल-टी.वी., लफासोटिंग मे लागल रहैछ I सब युवा सब चौक-चौड़ाहा धेने रहैछ, दरबज्जा सुन्न, पाहुन-परख के क्यो ने पुछनाहर, अधिकांश लोक परदेश मे सपरिवार रहैछ, पाहुन-परख के जल-चाहो-पान लेल कोनो बच्चा नहिं उपलब्ध रहैछ I लोक के संतोष समाप्त भ’ चुकल छैक, चित्त अस्थिर भ’ गेल छैक, कुकुरमाछी कटने रहै छैक I अपन खेती-बारी, डीह-डाबर छोड़ि नोकरी लेल लोक परदेश जाइछ मुदा योग्यता/विशेषज्ञताक अभाव मे ओत्तहु स’ अधिकांश हताश-निराश भ’ मुँह बिधुऔने फेर गामे घुड़ि अबैछ I अही भावक एकटा बर्ख़ 2016 ई० मे लीखल अपन कविता अंकित क’ रहल छी-       
“ गामक सब लोक मे
घिरना तभरले छै.
कलह के अन्गेजने सब
हिरदय तजरले छै..
                         काज धाज छोडिकसब
                            व्यसने मे लागल छै.
                           भिनसर ससांझ धरि
                               झगड़ा बेसाहल छै ..
पूजा पाठ ख़तम भेल
नशा के बोलबाला छै .
पापे मे लिप्त सब
धर्मक दिवाला छै..
                               छौंड़ा उचक्का सब
                               उचकपनी करि रहल.
                               श्रेष्ठक अनादर आ
                                भाई भाई लड़ि रहल..
चौक आ चौराहा पर
जूआक अड्डा छै.
पढ़ब लिखब जीरो आ
लफासोटिंग धंधा छै ..
        
                                   भोर सांझ दूरा पर
                                  भेटत ने लोक क्यो.
                                     चौके चौराहा पर
                                    लोकक जमाड़ा छै ..
पाहुन आ परख के
हाल चाल पूछत के.
घरबैया घर धेने
लो लै पूछत के..
                                    गीता रमायन आब
                                     ककरो ने आबै छै .
                                   फ़िल्मक हीरो हिरोइन
                                    सबके मोन भाबै छै..
                           
साँझखन मंदिर आ
पंडित लग लोक नै
चाहक दोकान पर
जमघट सब लागल छै ..
  
                          
संतोषक नाम नै
पाइ-पाइ रटने छै.
चित्त नै थिर ककरो
कुकुरमाछी कटने छै..
                                माटि-पानि छोडिकसब
                                      दूर देस भागै छै
                                 ओत्तहु सपिटाकमुंह-
                                    बिधुआयल आबै छै..
                                    बिधुआयल आबे छै..!!!!!”

                                                              
                                                        एखनुक गामक दुर्दशाक वर्णन किनको अनादर/ अपमानित करबाक उद्देश्य सँ नहिं कएल अछि I आधुनिक पीढ़ी के अपना गामक प्राचीन गरिमाक बोध हेतु एवं पुराण-नवक तुलनात्मक विवेचन हेतु दुहूँ के अंकित कएल अछि I अंत मे गामक सब देवी-देवता, गुरुजन एवं सब श्रेष्ठजन के नमन करैत  गामक कल्याणक कामना करैत छी I हमरा गामक सब व्यक्ति सद्गुणक खान बनैथ, देश-विदेश मे गामक नाम होअय, गाम धन-धान्य पूरित होअय I
“ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः I सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् I”        “ॐ शांतिः शांतिः शांतिः II”
----------------------------------------------------------------------कमला कान्त झा