Tuesday, July 11, 2023
लक्ष्य
जरूरी नै लकीरेके
फकीरे बनले रही,
जरूरी नै हम पुरनके
लीक ध' चलिते रही ।
जरूरी नै परिस्थितिके
अहर्निश कोसिते रही,
जरूरी अछि कोनहुना हम
लक्ष्य दिस चलिते रही ।।
लैछ बहुतो लोक निर्णय
परिस्थितिए देखिक',
सफलतम किछु सुविग सदिखन
चलथि लक्ष्ये पेखिक' ।
दिशा पवनक बदलबाके
छैक नै सामर्थ्य ककरो,
हर्ज की तरणीक मुख जँ
करी लक्ष्ये देखिक'!!!
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Monday, July 10, 2023
अज्ञता
अज्ञता अछि विपत्तिक जड़ि,
अहंता जड़िसँ नशाबय ।
ज्ञान सबसँ पैघ नौका,
पार भवसागर लगाबय ।।
पार भवसागर लगाबय,
वित्त क्षय किछु ने बिगाड़य ।
चरित्रक बल उन्नतिक जड़ि,
आत्मबल सभतरि उबाड़य ।।
गुरु थिका निज आतमा आ
मौन थिक सद्शिष्यता ।
मोन आत्मविलीन होइतहिं,
पड़ायत सब अज्ञता ।।
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Sunday, July 9, 2023
अवज्ञा नै करी ककरो
अपने जिनक स्वागत करब,
से घुरिक' अयता फेरसँ ।
उपेक्षा जिनकर करब, से
घुरि ने अयता फेरसँ ।।
घुरि ने अयता फेरसँ,तएँ-
अवज्ञा नै करी ककरो ।
अनेरे आयल करत से,
कहाँ फुरसति छैक ककरो ।।
आबिक' हरि घुरि जेता,
नै जानि केहनो भेष धयने ।
घुरि ने अयता फेर सँ ओ,
लाख पटकब माथ अपने ।।
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Saturday, July 8, 2023
अहंता अज्ञानता थिकि ।
अहंता अज्ञानता थिकि,
बुद्धि के छथि नाशकर्त्री I
क्रोध, मोहक जन्मदात्री,
विवेकक अपहरणकर्त्री II
विवेकक अपहरणकर्त्री,
मनुजता के मृत्युदात्री I
दोख दुर्गुण वृद्धिकर्त्री,
मनुख के गर्तक प्रदात्री II
गुमानक करु त्याग, सुन्दर-
देह एकदिन जाय जरता,
चिता भूमिक करी दर्शन,
जखन क' आबय अहंता II
मानू नै संबंध टूटत,
जँ अहं-बीया ने जनमत ।
फ़सल संबंधोक उपटत,
जँ गुमानक ख'ढ़ पनपत ।।
जँ गुमानक ख'ढ़ पनपत,
दहिन मे उधियाय लागत ।
काल के गति क्यो ने जानय,
क्षणे मे भसियाय जायत ।।
बाम दिन मे सब्र राखू,
दहिन मे छाती ने तानू ।।
प्रेम सबदिन रहय उर मे,
क्षमा के ब्रह्मास्त्र मानू ।।
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जे जैह रोपत सैह काटत ।
जायत ने संगमे कथू,
जे जैह रोपत सैह काटत ।
स्वयं भोग' पड़य सब किछु,
आन नहि क्यो दुक्ख बाँटत ।।
आन नहि क्यो दुक्ख बाँटत,
दर्द अनकर बाँटि ली ।
चारि दिवसक जिंदगी अछि,
हँसि-खेलाक' काटि ली ।।
यैह गिट्ठ' बान्हि ली जे,
भलाकर्ता भला पायत ।
एक नेकी छोड़िक',
संगमे ने कथू जायत ।।
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Friday, July 7, 2023
नाटक
नाटक टा भ' रहलै जगमे,
बूझथि क्यो नहि सत्य ।
असली बात बिसरि क' सब क्यो,
असते बूझथि सत्य ।।
असते बूझथि सत्य,
झूठमे लागल सब क्यो ।
कानि रहल अछि सत्य,
झूठ लेल पागल सब क्यो ।।
राति-दिन सब व्यस्ते,
मायालेल सब त्राटक ।
खुश रहबाक ने फ़ुरसति,
मुसकयबो थिक नाटक ।।
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Wednesday, July 5, 2023
श्रेष्ठता नै जन्मसँ हो ।
भले हो प्रतिकूलता,
अनुकूल ओ तकरा बनायत ।
ठाइन लेलक जँ मनुख तँ,
किछु ने किछु क' क' देखायत ।।
किछु ने किछु क' क' देखायत,
श्रेष्ठता नहि जन्म सँ हो ।
निपुणता आ श्रेष्ठता गुण आ
कला, निज कर्म सँ हो ।।
दूध डाढ़ी दही मक्खन
घृतादिक गुण होइछ अलगे ।
दाम भिन्ने रहय सबहक,
सब एकहि कुल के भले ।।
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