Monday, July 31, 2023

प्रेमक डोइर

ल'ग मे रहले सँ क्यो, नहि हृदय मे स्थान पाबय । दूर चलि गेनहिं सँ क्यो, नहि हृदय सँ दूरे भ' पाबय ।। ल'ग मे वा दूर मे हो, भाव सबसँ पैघ अछि । बिना प्रेमे ल'ग दूरे, प्रेमे ल'ग लगैत अछि ।। निशाकर आकाश, कुमदिनि- जले पर निबसैत छथि । होइत देरी शशिक दर्शन, प्रफुल्लित विकसैत छथि ।। ल'ग मे रहितो तँ बहुतो लोक नित लड़िते रहय । गप्प-सप्पो बन्द सबदिन दुगोला करिते रहय । थुक्कम-फज्झति सँ तँ दूरे रहब बढियाँ बुझि पड़य । भले फोने पर हो गप-सप, स्नेह के सरिता बहय ।। भले क्यो दूरे किए ने, याद हरदम जँ करय । डोइर मजगुत बनल रहने, प्रेम कहियो ने घटय ।। ***********************

ब्रह्मज्ञान टा सत्य

मिथ्या ज्ञाने रज्जुमे, होइछ सर्प आभास । तही जेकाँ ऐ देहमे, आत्मा केर अध्यास ।। आत्मा केर अध्यास, बिना ज्ञाने नै भागय । जेना बिना परकाश, तिमिर किन्नहुँ नै भागय ।। ब्रह्मज्ञान टा सत्य, अन्य मिथ्या अज्ञाने । संसारे के सत्य, बुझय सब मिथ्या ज्ञाने ।। ***************************

Saturday, July 29, 2023

सीखी साइकिल तही दिशामे

सीखी साइकिल तही दिशामे, जही दिशा गन्तव्य अभीप्सित । जँ सीखब विपरीत दिशा तँ, लक्ष्य असंभव आर अनिश्चित ।। लक्ष्य असंभव आर अनिश्चित, शून्ये पर पुनि लौटिक' आयब । फेरो उल्टा चल' पड़त तँ, जिनगी भरि बहुते पछतायब ।। तैं तेहने अभ्यास करी नित, स्रोते पर अँटकब सब सीखी । होयत सार्थक तखन परिश्रम, प्रगतिक मंत्र यैह सब सीखी ।। *****************************

मोन करू थिर स्रोत पर

कादो जन्मे सँ जमा, खाली नित कैरते रहू । सुन्ना जावत् तक ने होबय, तावत् उपछैते रहू ।। तावत् उपछैते रहू, ने चुरुक भरि बाँचय कथू । पात्र नै अजबारबै तँ, कोनाक' राखब कथू ।। भरू गंगाजल अमिय, धारू गुरुक उपदेश आबो । मौन थिर हो स्रोत पर, भरि जै ने फेरो थाल-कादो ।। ****************************

Wednesday, July 26, 2023

उत्तमा सहजा पूजा

पूजा सहजा उत्तमा, आत्मज्ञान जिज्ञास । चित्त सतत हृदयस्थ हो, करू तकर अभ्यास ।। करू तकर अभ्यास, अहं थिक बाधक सबसँ । मोहे थिक अज्ञान, प्रेम अति जीवे सबसँ ।। हमहीं सब जीवेमे, जगमे आन न दूजा । स्रोते पर टिकनाइ, सहज सर्वोत्तम पूजा ।। ********?*************???******

Sunday, July 23, 2023

ईशे बेड़ा पार करता

ईशे बेड़ा पार करता, आश हुनके पर धरू । जे स्वयं भयभीत अछि, तकरा भरोसे नहि रहू ।। तकरा भरोसे नहि रहू, नै जानि आफत कखन आयत । बहन्ना ध' देत गच्चा, बेर पर नहि काज आयत ।। रहय पापी सब डेराकय, देखि रहला सबटा ईशे । संत के नै भय कनिकबो, करता बेड़ा पार ईशे ।। ***********************

Saturday, July 22, 2023

जड़ि

करय जग मे नाम से जे, कसिक' जड़ि धेने रहय । डीह-डाबर के ने बिसरय, चाकरी कत्तहु करय ।। चाकरी कत्तहु करय, निर्भय रहय मजगूत जड़िजँ । डाइर-पल्लब-फूल-फल, सब पुष्ट हो मजगूत जड़िसँ ।। जकर जड़ि हो गहींर जतबे, से तते ऊपर बढ़य । घात अन्हर-बिहाड़िक, पाथरो किछु ने करय ।। ************************