Saturday, November 25, 2023

बतहू

बतहूक उमेर तीस भ’ गेल छलन्हि मुदा तखनो तक कुमारे छलाह I कोनो पैघ ऐब नै कहक चाही, कने सुधंग आ कने तोतराह! ओना तँ कन्याक अभावक कारणें बहुतो नीको बर सब कुमारे छथि, ऐब बलाके के पुछै अछि! शुरू मे अठबारे आ बाद मे नित्यप्रति डोकहर गौरीशंकरके जल चढ़ौलन्हि I बाबा कृपा केलखिन्ह आ एकटा घटक पहुँचलाह I बतहूक पिताजी धरफरायले छलथिन्ह, तुरत ठीक भ’ गेलन्हि I कन्या आँखि मुनल मे बड्ड सुन्नरि, आँखि खोलने एक आँखि सँ कनाहि ! मुदा एहन बर लेल ऐ सँ बेसी सुन्नरि तकला सँ जिनगी भरि कुमारे रह’ पड़ितनि I दान-दहेज़ मे बेसी नै, बरक बाप द्वारा कन्या बापके मात्र एगारह सै टाका देब’ पड़लनि I शुभ-शुभक’ बियाह भेल I एगारह टा बरियाती! खूब स्वागत! बरियाती सब स्वागतसँ अभिभूत! भोरहरबामे सोहागक बेर बरियाती जखन आँगन पहुँचल तँ देखलक जे बतहू बीच आँगनमे उघारे देहे चित्त सूतल छथि आ छातीपर एकटा उक्खैर राखल छन्हि I एकटा बरियाती पूछि बैसलथिन्ह- “ बतहू ई की?” -“ ई बिध होइ छै!” सबहक हँसी देख’ जोगड़क! कन्याक सखी-बहिनपा सबहक ई किरदानी छल!!! ************************************************************

Thursday, November 23, 2023

बाल्यकाल

हे बाल्यकाल! घुरि आउ हमर, हे बाल्यकाल! घुरि आउ हमर ।। नै रौद-बसातक भय कनियो, बरखा-अछार-फानल-कूदल, तितली पकड़क लेल दौड़-धूप, दोस्तक सङ् मे हुड़दंग मचल । हे बाल्यकाल! घुरि आउ हमर, हे बाल्यकाल..........।। तुरतहिं झगड़ा आ प्रेम तुरत, नै मोन मे कोनो बात टिकल, किछुओ चिन्ता ने फिकिर कथुक, मित्रक झुंडे छल स्वर्ग जकर । हे बाल्यकाल! घुरि आउ हमर, हे.......।। कबडी-कबडी टाइलक-पुल्ली, लुक्का-छिप्पी गोटरस-गोटरस, पोखरि-झाँखुर सौँसे रपटल, गुड्डी-बाजी मे सतत रमल । हे बाल्यकाल! घुरि आउ हमर, हे..........।। ने बैर-द्वेष के नामो छल, ने जाति-धर्म के भानो छल, ने नीक-बेजायक ज्ञानो छल, सब दोस्ते जग मे सगरो छल । हे बाल्यकाल ! घुरि आउ हमर, हे.............।। खिस्सा नानी-नानाक सूनि, सपना के राजकुमार बनल, मायक कोरा छल स्वर्गोपरि, ओकरे सँ रूसब-बौंसब छल । हे बाल्यकाल! घुरि आउ हमर, हे...............।। लूडो-लूडो कैरम-गोटी, गेंदक पाछू बेहाल रहल, कागत के नौका मे डूबल, खएबा-पीबा के सुधि बिसरल । हे बाल्यकाल! घुरि आउ हमर, हे.........।। बाड़िक-केरा-बड़हर-लताम, खीरा नेबो पर सब लुधकल, कतबो बाबी-काकी बाजलि, सब आइन बिसरि कए टूटि पड़ल । हे बाल्यकाल! घुरि आउ हमर, हे बाल्यकाल! घुरि आउ हमर !!! *************************

Wednesday, November 15, 2023

खेतक अनुरूप फसल

होइछ दुर्बल मैथिलक गार्हस्थ जीवन, मातृ पक्षक ख्याल ने ककरो रहै छै । जँ रहत निर्बल शकट केर एक पहिया रेस मे की तेहन गाड़ी टिकि सकै छै ।। गर्भ मे अबिते उपेक्षित रहय निशदिन, जकर जन्मे समाजक लेल होइछ अनुचित । से कोना बनती आ जनती सबल संतति चिकित्सा शिक्षा ने भोजन जनिक समुचित ।। पश्चिमक सब भेल विकसित, मुदा एखनो- रूढ़ि, भ्रम मे सकल मैथिल छी पड़ल । करू प्रोत्साहित सतत कन्या के, उन्नति- के रोकत, उत्साह जँ नारिक प्रबल ।। खेत जेहने रहत फसलो हैत तेहने माय सबला जखन सबलो पुत्र तखनहि । पुत्र लव कुश के सदृश जनमैछ निश्चय माय से'हो जानकी सम हैत जखनहि ।।

Friday, November 10, 2023

कानब उचित नहि

हरा गेल जँ कथू तँ कानब उचित नहि, अहाँ लग जे बस्तु अछि सब अही जगतक । कथी ल' क' छलहुँ आयल अहि जगत मे, जे भेटल से बस्तु अछि सब अही जगतक।। आइ जे किछु अहाँ लग सम्पत्ति भौतिक, सकल दोसर केर से सब काल्हि तक छल । फेर परसू यैह सब तेसर के होयत, जे हमर नहि, हरा गेल तँ कथी बिगड़ल? जते संग्रह कएल सब छल अहीठामक, खुशी होउ किछु भार माथक घटा लेल जँ । बिदा बेर मे संग मे नहि जाइछ किछुओ, माथ हल्लुक बुझी किछुओ हरा गेल जँ ।। ***************************

Saturday, November 4, 2023

अहंता

अहंता अज्ञानता थिकि, बुद्धि के छथि नाशकर्त्री I क्रोध, मोहक जन्मदात्री, विवेकक अपहरणकर्त्री II विवेकक अपहरणकर्त्री, मनुजता के मृत्युदात्री I दोख दुर्गुण वृद्धिकर्त्री, मनुख के गर्तक प्रदात्री II गुमानक की काज, सुन्दर- देह एकदिन हो जरंता । चिता भूमिक करी दर्शन, जखन क' आबय अहंता II ***********************

Thursday, October 19, 2023

सत्यक मार्ग

होइछ सत्यक मार्ग काँटक, मुदा वैह अछि श्रेष्ठकर । असत् मायाजाल मिठगर, होइछ अतिशय सुगमतर ।। होइछ अतिशय सुगमतर, मिट्ठेमे कीड़ा सब फड़य । मुदा नोनक ल'गमे ने, कोनो कीड़ा सटि सकय ।। बिपति कालोमे सुधीजन, लेथि ने आश्रय असत्यक । कष्टकर अछि यदपि अतिशय, विजय निश्चय होइछ सत्यक!!! 💐💐💐💐💐💐💐💐💐

Monday, October 16, 2023

वर्तमानमे जीबी

काल्हुक चिन्ता मे डुबल, आजुक सुधि बिसराय । काल्हि पुनः आजुक करत, दुखी सतत रहि जाय ।। दुखी सतत रहि जाय, खुशी सब रहू निरन्तर । रहबे करतै चिन्तन मे, दू लोकक अन्तर ।। वर्तमान मे जीबी, करू सुचिन्तन आजुक । सबदिन से पछताय, डुबल चिन्तन जे काल्हुक ।। ***************************