Kamalji
Monday, April 27, 2026
रिश्ता रहत प्रगाढ़, रहि गेने मौने ।
मौने रहि गेने अहँक,
रिश्ता रहत अटूटि ।
उचितो जँ बाजब अहाँ,
रिश्ता जायत टूटि ।।
रिश्ता जायत टूटि,
बाढ़ि उलहनके आयत ।
उकटा-पैंच, दुगोला;
त्याग पाइनमे जायत ।।
कृत उपकार बिसारि,
चुप्प बैसू ध' कोने ।
सबसँ प्रेम प्रगाढ़,
रहत रहि गेने मौने ।।
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