Kamalji
Saturday, April 18, 2026
भूलचूकसँ भेल पाप गंगाजी धोबथि
भूलचूकसँ भेल पापके,
गंगा देथि मेटाय ।
अंदर-बाहर शुद्ध भए,
सकल पाप धुलि जाय ।।
सकल पाप धुलि जाय,
त्रिपथगाकेँ जग जानय ।
दयामयी मायक महिमा,
सबलोक बखानय ।।
जानिबूझि कृत पाप,
मेटय यमराज शूलसँ ।
गंगा धोबथि पाप,
भेल जँ भूलचूकसँ ।।
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