Monday, April 27, 2026

भूलचूकसँ भेल पाप गंगाजी धोबथि

भूलचूकसँ भेल पापके,
गंगा देथि मेटाय ।
अंदर-बाहर शुद्ध भए, 
सकल पाप धुलि जाय ।।
सकल पाप धुलि जाय, 
त्रिपथगाकेँ जग जानय ।
दयामयी मायक महिमा,
सबलोक बखानय ।।
जानिबूझि कृत पाप,
मेटय यमराज शूलसँ ।
गंगा धोबथि पाप,
भेल जँ भूलचूकसँ ।।
***********************

No comments:

Post a Comment