Sunday, April 5, 2026

ध्यान स्रोतेपर राखू

राखू स्रोतेपर नजरि, निष्ठा राखू संग ।
फिकिर ने निंदकके करू, सतत रहू निःसंग ।।
सतत रहू निःसंग, धर्मके मार्ग ने त्यागी ।
कतबो होबय कष्ट, कर्मसँ दूर ने भागी ।।
कहथि 'कमल' सुनु धीर, अकथ कखनहुँ जुनि भाखू ।
अपन धर्मपर अडिग, नजरि स्रोतेपर राखू ।।

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