Monday, July 15, 2024
माया बनाम ज्ञान
"जे कियो मायाक पाछाँ
रहत लागल,
होइछ नै तकरासँ नमहर
कियो पागल ।
आइ तक नै कियो ओकरा
पकड़ि सकला,
महा अज्ञानी थिका
से नर अभागल ।।
जे कियो पग सूर्य दिस
प्रारंभ करता,
रहत लागल तनिक पाछाँ
छाँह हुनकर ।
होउ सब जिज्ञासु उन्मुख
ज्ञान रवि दिस,
स्वयं सुख-समृद्धि
पाछाँ रहत तिनकर ।।"
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Wednesday, July 10, 2024
नारि
"सहस्रों पुष्प मिलिजुलिक' सुधर माला बनाबै छथि,
सहस्रों दीप मिलिक' आरतिक थारी सजाबै छथि ।
अनंतों बूँद मिलिजुलिक' करथि निर्माण सरिता के,
मुदा एसगरि सुशीला स्वर्ग सम घर के बनाबै छथि ।।
भले सम्पन्नता सुख-शान्तिमय परिवार किनको छन्हि,
भले साक्षर नीरुज बलबान सब लक्षण विकासक छन्हि ।
मुदा जँ नारिके सम्मान नै ओइ गेहमे होइ छन्हि,
तँ नर्के सदृश बूझू गेह से पहरा विनाशक छन्हि ।।"
Wednesday, July 3, 2024
आत्म दर्शन
ताकै छी मस्जिद गुरुद्वारा
मंदिर चर्चो आ जगभरिमे ।
अनगिन जीवक दिस ध्यान दियौ,
भ' जायत दर्शन क्षणभरिमे ।।
घिरनासँ घिरने भेटै छै,
सेवासँ मेवा प्राप्त करब ।
जँ दया प्रेम बिलहब सगरो,
सबहक हिरदयमे बास करब ।।
सेवो नै पूजा हो सबहक,
शिवरूप बूझि सबके अइठाँ ।
एक्के ईश्वर सबहक उरमे,
तँ आन कियो नै अछि अइठाँ ।।
जँ पूजो नै क' सकय कियो,
चुपचाप स्वयंमे पैस जाउ ।
चितके थिर क' इंद्रिय समेटि,
भए मौन हृदयमे बैस जाउ ।।
Thursday, May 9, 2024
औंठी
बात बहुत पुरान थीक । सिंदरीमे अभियांत्रिकीक द्वितीय बर्खक छात्र छलहुँ । गर्मी छुट्टीमे गाम आयल छलहुँ । श्रद्धेय स्व0 परम भैया सेहो मोतिहारीसँ गाम आयल छलाह । ओ मोतिहारीक हनुमान सुगरमिल परिसर स्थित हनुमान मंदिरक पुजेगरी छलाह । हुनका संगें हुनक एकटा पैघ मारवारी मित्र सहो आयल छलन्हि । नाम तँ याद नहि अछि, किछु काल लेल मानि लीय' "चौखानी" । हमरासँ तीन दिन पहिने परम भैया आ चौखानी आयल छलाह । तीन दिनमे चौखानी खूब लोकप्रिय भ' गेल छल । चौक-चौराहा, कलम गाछी सागरो घुमैत छल । ओकरा संगे हरदम दस-बीस टा लोक रहैत छलैक । चाह-पान, हाहा-हीही खूब होइत छलैक । हम एलहुँ तँ दरबज्जापर ओकरासँ भेट भेल। परिचय भेल आ हल्का-फुल्का बात भेल । हमरासँ भेट होइत देरी पता नै की जादू भेलैक जे ओ आब हमरा बिना कतहु जेबे ने करय । हमरा बुझाइछ जे यद्यपि ओ गामक लोकसबसँ घुलि-मिलि गेल छल तथापि ओकरा असुरक्षा बोध हरदम रहैत छलैक । ओकरा संग हरदम रह'बलामे सदानंद, महारुद्र, पवन, चन्द्रनाथ, नंदू .. आदि अनेक लोक छलथिन्ह । एहन-एहन अवधूत सबहक बीच ओ परदेशी सीधा-सादा चौखानी कृत्रिम प्रसन्नता देखबैत रहैत छल । हमरासँ भेट होइत देरी ओकरा जानमे जान एलैक ।
ओ एक दिन हमरा संग एकांतमे दोस्तीक बंधन जोड़लक आ एकटा हीरा जड़ित सोनाक औंठी आँगुरमे पहिरा देलक । भ' सकैत अछि ओकरा समाजमे अहिना दोस्ती लगेबाक प्रथा छल हेतैक, हम शुद्ध ग्रामीण मैथिल समाजमे पलल एकटा अकिंचन विप्र ऐ प्रथासँ साफे अनभिज्ञ अकचकायले रहि गेलहुँ । हमरो किछु देबाक चाही ई सोचबो नै केलहुँ । हँ, एकटा बात मोनमे आयल जे संभवतः हेरेबाक वा चोइर हेबाक डरे ओ हमरा लगमे अपन मूल्यवान धरोहर बिसबास क' क' राखि देलक अछि जे जयबाक काल तक सुरक्षित रहैक ।
आब चौखानीक मुखपर प्राकृतिक खुशी लौटि गेल छलैक । आब ओ निश्चिंत भ' डोकहर, कपलेसर, खजौली, सुक्खी, उचैठ, कलुआही, मधुबनी.. सौंसे घुमैत रहैत छल । ओ खूब नीक हरमुनियाँ बजाबय आ गीतो खूब नीके गबैत छल । आमक गाछीमे ओकर उन्मुक्त हँसी वर्णनातीत रहैत छल । एक मास ओ रहल, कोना ओ एक मास बीति गेल किछु नै बुझायल ।
ओ जखन बिदा भेल तँ हम धधहरा गाछीमे छलहुँ । हमरा दिमागमे छल जे ओ भोजनोपरांत बिदा होयत, मुदा ओ जलखै क' क' बिदा भ' गेल । पता चलल जे जाइतकाल ओ हमार खोज केने छल । हमर मोन छटपटा उठल । हम बिना जलखै केनहिं कलुआही लेल दौड़ि पड़लहुँ । बाबू मनो केलनि जे कत' ढोंर हाँक' जायब, ओ चलि गेल होयत । मुदा हमरा किछु नै सुनायल ।
दौड़ते-दौड़ते कलुआही पहुँचलहुँ । संजोग देखू जे बस लेट छलैक । चौखानी बसमे बैसि गेल छल । बस एक मिनटमे खुज'बला छलैक, सीटी द' देने छलैक । हम चौखानी लग जाक' उदास मोने ओकरासँ हाथ मिलेलहुँ आ आँगुरसँ औंठी निकालि ओकरा द' देलिऐक । ओ खुश भ'क' ल' लेलक आ हम तेजीसँ उतरि गेलहुँ ।
भगवान हमर इज्जति बचौलन्हि । पता नहि ओ हमरोलेल की की सोचैत छल होयत!
गामपर आबि निसाँस छोडलहुँ । बाबू पुछलाह- "भेटल की नहि"? कहलियन्हि-"हँ, भेटि गेल" । मुदा,हुनका कहाँ बूझल छलन्हि जे हमरा माथक बड़का बोझ उतरि गेल छल!! ओ घटना एखनो ओहिना याद अछि ।
Monday, April 29, 2024
शान्त राखल करू चित ।
शांत राखल करू चित,
निर्णय ने धड़फड़ मे करू ।
जोड़ सँ चिचियाउ नहिं,
किछुओ ने हड़बड़ मे करू ।।
किछुओ ने हड़बड़ मे करू,
हल्ला सतत काजे बिगाड़त ।
धरू चुप्पी काज सम्हरत,
स्वास्थ्य के से'हो सुधारत ।।
दुख अहींके पड़त भोग',
चित्त जँ नै शांत राखल ।
सुख सेहो भेटत अहीं के,
चित्त के जँ शांत राखल ।।
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Saturday, April 20, 2024
प्रारब्ध
होइछ सबसँ नीक हमरालेल जे किछु,
ईशके छन्हि पता सबटा बात से ।
तखन जँ क्यो मँगै छी हुनका सँ किछुओ,
करै छी व्यवधान हुनका काजमे ।।
करी सबटा काज जे प्रारब्ध अछि,
मानिक' आदेश चुप्पे-चाप हुनकर ।
मुदित सदिखन रही अपना हालपर,
यएह सबसँ पैघ पूजा हएत हुनकर ।।
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होइछ सबसँ नीक हमरालेल जे किछु,
ईशके छन्हि पता सबटा बात से ।
तखन जँ क्यो मँगै छी हुनका सँ किछुओ,
करै छी व्यवधान हुनका काजमे ।।
करी सबटा काज जे प्रारब्ध अछि,
मानिक' आदेश चुप्पे-चाप हुनकर ।
मुदित सदिखन रही अपना हालपर,
यएह सबसँ पैघ पूजा हएत हुनकर ।।
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Saturday, March 9, 2024
क्रोधपर विजय
शिष्य अछि क्रोधी स्वभावक
गुरुक सम्मुख आबि बाजल-
"क्रोध हमरा सतत आबय
बना दैछ निछच्छ पागल ।।
गुरु! अहँक व्यवहार उत्तम,
सतत मिट्ठे टा बजै छी ।
क्रोध जितने छी, ने कखनो-
कटु वचन ककरो कहै छी ।।
हमर भाग्यक रेख की अछि?
कृपा क' क' ई बतबितहुँ ।
संगहि अप्पन क्रोध जितबा
के रहस सेहो सुनबितहुँ ।।"
संत-"अद्याबधि ने अप्पन,
रहस किछुओ हम जनै छी ।
मुदा तोहर भाग्यरेखा-
के रहस सबटा जनै छी ।।"
-"अहँक शरणागत छी गुरुवर!
चरण-रज सँ सब सिखल ।
कृपा क' क' बता दीतहुँ,
भागमे अछि की लिखल?"
-"लिलाटक रेखा कहै छौ,
आब बेसी दिन ने बचबैं ।
यैह लीखल छौ जे साते
दिनमे तों प्रस्थान करबैं ।।"
आन जँ ई बात कहितै,
शिष्य हँसिकय टालि दीतय ।
मुदा गुरुमुख बात, हिम्मति-
भेलै नहि जे काटि सकितय?
गुरु चरण स्पर्श क' क',
शिष्य मुँह लटका क' चलि गेल ।
ताहि दिन सँ शिष्य केर-
व्यवहार साफे क' बदलि गेल ।।
प्रेम सबसँ करय, नहिएँ-
क्रोध ककरो पर करै छल ।
भजन-पूजा-पाठ ध्यानेमे
सतत लागल रहै छल ।।
पूर्वमे व्यवहार उल्टा-
केने छल जिनका संगें ।
माँगि माफी करय लागल-
प्रेम ओ तिनका संगें ।।
एलै सातम दिवस तँ ओ-
गुरुक सोझाँ जाय बाजल-
"क्षमा गुरु! आशीष दीय',
देह तजबा समय आयल ।।"
-"पुत्र! बाजह सात दिन के-
कोन विधि सँ तों बितेलह?
की तों पूर्वे जेकाँ सबपर,
खूब तामस के देखेलह?"
-"गानि-गुथिक' सात टा दिन,
शेष जिनगी केर पाओल ।
पाठ-पूजे-ध्यान-प्रेमें,
डूबिक' तकरा बिताओल ।।
कष्ट देने छलहुँ उरमे
पूर्वमे जकरा सभक हम ।
क्षमा सबसँ माँगि अयलहुँ
गेह जा तकरा सभक हम ।।"
-"बूझि गेलह मर्म सबटा,
मृदुल व्यवहारक हमर ।
सात दिन सप्ताहमे अछि,
तहीमे सबक्यो मरत ।।"
शिष्य गुरु-संकेत बुझि गेल,
ताप मोनक मे'टि गे'लै ।
मृत्युभय तँ छल बहन्ना,
सार-जिनगिक भे'टि गे'लै ।।
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