Monday, May 25, 2026

फुफकारब अछि बहुत जरूरी

जँ नहि फुफकारब तँ जगमे,
साधुगणक जीयब नै संभव ।
यद्यपि नै अनुरक्त रहै छथि,
तदपि शरीरक टिकब असंभव ।।
तदपि शरीरक टिकब असंभव,
दुष्ट भरल अछि सकल जगतमे ।
जँ प्रतिकार करब नहि अपने,
जीयब नहि अछि सरल जगतमे ।।
 मच्छर जोंक उड़ीसो भागत,
 चुप्प-चाप बैसला सँ नहि ।
शांति अहाँके रहि नहि पाओत, 
दुष्ट जंतु भगायब जँ नहि ।।

Sunday, May 24, 2026

हस्ती कहिमुकरी(2)

कृष्ण जलधर सदृश हरि नहि,
दीर्घकाय मुदा छी गिरि नहि ।
नाकसँ हम करी मस्ती,
की सखि केशव? नहि सखि हस्ती ।।

Wednesday, May 20, 2026

दर्पण(कहिमुकरी-1)

हमरा दिस जखने क्यो ताकय,
अपनाके हमरेमे पाबय ।
जेहन रहय जे तेहने चित्रण,
की सखि केशव? नहि सखि दर्पण ।।

Saturday, May 2, 2026

मोनक व्यथा धरी मोनेमे

सर्वोत्तम होयतजे मोनक,
पीड़ा राखू मोन ।
मलहम कम्मे लगमे भेटय,
बेसी छीटय नोन ।।
बेसी छीटय नोन, 
व्यथा लखि मन मुस्कायत ।
बाजत सगरो जाय, 
नगरभरि ढोल बजायत ।।
कह 'कवि' सोचि-बिचारि,
मौन हो सबसँ उत्तम ।
मोनक व्यथा धरी मोने
तँ हो सर्वोत्तम ।।

Monday, April 27, 2026

भूलचूकसँ भेल पाप गंगाजी धोबथि

भूलचूकसँ भेल पापके,
गंगा देथि मेटाय ।
अंदर-बाहर शुद्ध भए, 
सकल पाप धुलि जाय ।।
सकल पाप धुलि जाय, 
त्रिपथगाकेँ जग जानय ।
दयामयी मायक महिमा,
सबलोक बखानय ।।
जानिबूझि कृत पाप,
मेटय यमराज शूलसँ ।
गंगा धोबथि पाप,
भेल जँ भूलचूकसँ ।।
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रिश्ता रहत प्रगाढ़, रहि गेने मौने ।

मौने रहि गेने अहँक, 
रिश्ता रहत अटूटि ।
उचितो जँ बाजब अहाँ, 
रिश्ता जायत टूटि ।।
रिश्ता जायत टूटि, 
बाढ़ि उलहनके आयत ।
उकटा-पैंच, दुगोला; 
त्याग पाइनमे जायत ।।
कृत उपकार बिसारि, 
चुप्प बैसू ध' कोने ।
सबसँ प्रेम प्रगाढ़, 
रहत रहि गेने मौने ।।

Tuesday, April 7, 2026

बुद्धिक उपयोग

बुद्धि थिक अनमोल जगमे,
प्रकृति प्रदत उपहार ।
क्यो कपटी धर्मिष्ठ क्यो, 
होइछ अपन संस्कार ।।
होइछ अपन संस्कार, 
जेहन कुलमे जे जनमय ।
एक बनय अपकर्मी,
दोसर पुण्ये अरजय ।।
लोक सेवाभाव गंगा-
स्नानसँ हो शुद्धि ।
कपट तजि परमार्थमे 
खर्चथु अपन सब बुद्धि ।।