Sunday, August 16, 2026

अपना दिस नहि ताकल कहियो ।

अनके समझाब'मे जिनगी हम्मर बीति गेल,
कतेक गेलै साल, कतेक ई उमर ढलि गेल।
अपन अंतर के कखनो हम टटोललहुँ नै,
कि कहैए मन हम्मर, कखनो ई सोचलहुँ नै।
परक खिड़की झाँकएमे, अपन दुआरि बन्द रहल,
परक रस्ता तकएमे, पैरक नीचाँ गाम बहल।
कहियो अपना दिस घुरि क' हम ताकल नै,
अपन मोनक पीर कखनो हम भाँपल नै।
समय जखन बीति गेल, हाथ कछु आइल नै,
बच रहल सिर्फ़ याद, आन किछु पाएल नै।
जखन भेल भोर, तखन एकटा ज्ञान भेल,
छूटि गेल जे असल, ओकर आब भान भेल।
सबसँ जरूरी जे छल, ओ तँ हमही छलहुँ,
परक सोझाँ जिन्गी भरि, मोम जकाँ गनलहुँ।
आब पछता क' की हेतै, जखन समय बीति गेल,
अनके समझाब'मे जिनगी हम्मर बीति गेल।

Thursday, August 13, 2026

बिसबास

बिसबास जड़ि अछि मूलधन,
 जीवनक अनमोल । 
प्रेम आ सम्मानके जड़ि, 
द' सकत के मोल!!
द' सकत के मोल, 
कहियो जँ  इ ढहि गेल । 
रहल ने बाँचल कथू,  
सर्वस्व चलि गेल ।।
'कमल' राखू ध्यान ईशक, 
धरू हुनके आस । 
बिपतिसँ छी तंग कतबो, 
ढहय नै बिसबास ।।

Saturday, July 4, 2026

सोचू अछि मरबाक कथीलेल

कथीलेल मरबाक जरूरति,
जे नहि जिनगी भरि ई सोचल । 
व्यर्थ गमाओल से जिनगीके,
तिनकर जिनगी मरले बीतल ।।
तिनकर जिनगी मरले बीतल, 
यंत्रक सम से जिनगी काटल ।
यद्यपि स्वास चलल भरि जिनगी,
 अर्थक जोड़'मे से पागल ।।
कहथि 'कमल' संकल्प एक क',
जीवन अर्पण करी तहीलेल । 
भ्रम थिक जग, अछि सत्य ईश टा,
सोचू अछि मरबाक कथीलेल!!

Wednesday, May 27, 2026

फोन(स्मार्ट फोन)

भरिदिन हमरे संग बिताबय,
सुंदर-सुंदर रूप देखाबय ।
नेट बिना लागय नहि मोन,
की सखि साजन? नहि सखि फोन ।।

Monday, May 25, 2026

फुफकारब अछि बहुत जरूरी

जँ नहि फुफकारब तँ जगमे,
साधुगणक जीयब नै संभव ।
यद्यपि नै अनुरक्त रहै छथि,
तदपि शरीरक टिकब असंभव ।।
तदपि शरीरक टिकब असंभव,
दुष्ट भरल अछि सकल जगतमे ।
जँ प्रतिकार करब नहि अपने,
जीयब नहि अछि सरल जगतमे ।।
 मच्छर जोंक उड़ीसो भागत,
 चुप्प-चाप बैसला सँ नहि ।
शांति अहाँके रहि नहि पाओत, 
दुष्ट जंतु भगायब जँ नहि ।।

Sunday, May 24, 2026

हस्ती कहिमुकरी(2)

कृष्ण जलधर सदृश हरि नहि,
दीर्घकाय मुदा छी गिरि नहि ।
नाकसँ हम करी मस्ती,
की सखि केशव? नहि सखि हस्ती ।।

Wednesday, May 20, 2026

दर्पण(कहिमुकरी-1)

हमरा दिस जखने क्यो ताकय,
अपनाके हमरेमे पाबय ।
जेहन रहय जे तेहने चित्रण,
की सखि केशव? नहि सखि दर्पण ।।