Tuesday, February 24, 2026
उलहन
वैवाहिक वर्षगाँठपर युगल-जोड़ी कएल विचार,
सालभरि लिखब एक-दोसरापर उलहन-विकार।
पत्नीक डायरीमे भरि गेल सगरो उलहन-
"अहाँ नै मानलहुँ कहियो हमर एकोटा वचन ।
कहियो नै सिनेमा नै कहियो उपहार,"
उलहनक फिरिस्त छलनि सगरो बारम्बार ।
पतिक आँखि भरि अयलनि, मानि लेलनि हारि,
"सुधारिलेब अपनाकेँ कएलनि करारि ।"
आब छलनि बारी पतिक लिखल डायरीक,
जेना कोनो पोथी हो श्वेत-धबल शायरीक ।
सब पन्ना खाली, कोनो अक्षर नै छल लिखल,
पत्नी पुछलनि, "की अहाँकें किछुओ नै भेटल?"
पति कहलनि, "अंतिम पन्ना पेखू" आ भ' गेला मौन,
"अहाँक त्यागक आगू सब कमी अछि गौण ।
अहाँ तँ हमर छाँह छी, आ प्राणक आधार,
अपनहि छाँहमे दोख ढुँढि सकबामे छी हम लाचार ।"
पढ़ितहि ई बात, पत्नीक नयन सँ बहय लागल अश्रु-धार,
ऐ ब्रह्मास्त्रके के रोकि सकत, शिकायतक भेल बंटाढार ।
तकर बादक वर्णन करब, ककरो ने लगतै पार,
महकि उठल घर-आँगन,आ गमकि उठल सकल संसार ।।
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