Kamalji
Thursday, August 13, 2026
बिसबास
बिसबास जड़ि अछि मूलधन,
जीवनक अनमोल ।
प्रेम आ सम्मानके जड़ि,
द' सकत के मोल!!
द' सकत के मोल,
कहियो जँ इ ढहि गेल ।
रहल ने बाँचल कथू,
सर्वस्व चलि गेल ।।
'कमल' राखू ध्यान ईशक,
धरू हुनके आस ।
बिपतिसँ छी तंग कतबो,
ढहय नै बिसबास ।।
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