Thursday, October 19, 2023
सत्यक मार्ग
होइछ सत्यक मार्ग काँटक,
मुदा वैह अछि श्रेष्ठकर ।
असत् मायाजाल मिठगर,
होइछ अतिशय सुगमतर ।।
होइछ अतिशय सुगमतर,
मिट्ठेमे कीड़ा सब फड़य ।
मुदा नोनक ल'गमे ने,
कोनो कीड़ा सटि सकय ।।
बिपति कालोमे सुधीजन,
लेथि ने आश्रय असत्यक ।
कष्टकर अछि यदपि अतिशय,
विजय निश्चय होइछ सत्यक!!!
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Monday, October 16, 2023
वर्तमानमे जीबी
काल्हुक चिन्ता मे डुबल,
आजुक सुधि बिसराय ।
काल्हि पुनः आजुक करत,
दुखी सतत रहि जाय ।।
दुखी सतत रहि जाय,
खुशी सब रहू निरन्तर ।
रहबे करतै चिन्तन मे,
दू लोकक अन्तर ।।
वर्तमान मे जीबी,
करू सुचिन्तन आजुक ।
सबदिन से पछताय,
डुबल चिन्तन जे काल्हुक ।।
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Sunday, September 24, 2023
बेटी दिवस
बेटी दिवस पर बेटी विहीन एकटा मायक आंतरिक कामना :-
हे ईश्वर!
हमरा ऐ जीनगीमे बेटी नै देलहुँ आहाँ ।
मुदा,
दोसर जन्ममे
हमरा एकटा बेटी जरूर देब ।
हाँ,
एकटा शर्त जरूर अछि-
हमरा एहन बेटी देब जे
बियाहसँ पहिले हम्मर रहय मुदा
बियाहक बाद ओ
सासु-ससुरके सेवामे लागल रहय,
हमरासँ बेसी
सासु-ससुरके सम्मान दिअय ।
जँ से नै द' सकी तँ
नहिएँ देब सएह ठीक ।
Saturday, September 23, 2023
ज्ञान
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-"बौआ!
समय-साल ठीक नै छैक,
बरखामे बेसी काल
बाहरमे ठाढ़ रहब उचित नहि,
अन्दर आबि जाउ,
अहाँ सर्दियाह छी,
सर्दी-खोंखी-बोखारसँ
आइ-काल्हि
बाँचिक' रहक चाही ।"
-" पापाजी!
अहाँ व्यर्थमे
चिन्ता करैत रहैत छी;
हम आब कोनो बच्चा छी जे
अहाँ सदिखन टोकैत
रहैत छी?
नीक-अधलाहक आब
हमरा बढियाँ ज्ञान अछि,
अहाँक हरदम टोकब
हमरा नीक नहि लगैत अछि ।"
-"बौआ!
बापक आगू सन्तान
सबदिन बच्चे रहैत छैक ।"
-"ठीक छैक,
बुझि गेलिऐक;
आब जाउ
अप्पन काज देखू,
हम्मर चिन्ता बेसी नै करू ।"
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जखन बेटा नहि मानैत छन्हि तँ
बुड़हा पाँच बरखक पोता
चिन्टू के कोरामे ल' क'
बाहरमे आबिक'
ठाढ़ भ' जाइत छथि ।
बेटा दौड़िक' आबैत अछि आ
चिन्टूके दादाजीक कोरसँ
झपटिक' अन्दर ल' जाइत अछि-
"बाबूजी!
अहाँके किछुओ ज्ञान नहि अछि,
चिन्टू सर्दियाह छैक,
भिजलासँ ओकरा
सर्दी-खाँसी-बोखार भ' सकैत छैक!"
-"बौआ!
तों ठीके कहैत छह;
हमरा किछुओ
ज्ञान नहि अछि!!!!"
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Friday, September 22, 2023
अनकर झगड़ामे नै पडू
किछु लोकक
आदति होइछ जे
अनावश्यक
दू लोकक गप्प मे
कूदि पड़त,
बिना पुछनहिं
ओकर झगड़ा फ़रियाब' मे
लागि जायत,
कहियोकाल लोकक ई आदति
बड्ड महग पड़ि जाइछ ।
सद्य: आँखिक देखल
बात कहै छी-
लुचबा आ सुटबा दू भाइ अछि,
दुनू महालंठ,
बेसी काल गामे पर रहै अछि,
कहियो काल नोकरी करक लेल
परदेसो चलि जाइछ ।
जावत्काल गाम पर रहैछ
भोर स' ल'क' साँझ तक
कुस्तम-कुस्ता करिते रहैछ,
फेर तुरंत सलाहो भ' जाइछ आ
संगें-संग पठशल्ला दिस
टहल' विदा होइछ ।
टोला-पड़ोसिया के
कोनो मतलब नहिं,
के डेली ओकरा सबहक
झगड़ा मे पड़य,
ओकरा दुनूक फ्रेंडली-फाइट
देखिक' चुपचाप सब मुसका दैछ ।
आइ मक्खन बाबूक
समधि आयल छलथिन्ह,
हुनका दुनू भाइक झगड़ा
देखल नै गेलनि,
कोना आँखिक सोझाँ
दुनू के लड़' दित'थिन्ह !
जाक' छोड़ाब' लगलथिन्ह ।
एखन शुरुए भेल छलैक,
कनिको गर्मी नै झड़ल छलैक ।
दुनू धाकड़ हिनके पर
अपन-अपन गर्मी उतार' लागल ।
से तावत्काल तक
गर्मी उतारैत रहल
जावत्काल तक ओ
बेहोश नै भ' गेला ।
अस्पताल मे होश एलनि त'
कान पकड़ला जे
आब दू आदमीक झगड़ा मे
नै पड़ब,
टाँग-हाथ सब मे प्लास्टर
कएल गेलनि जे
एक मासक बादे कटलनि ।
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Tuesday, September 5, 2023
अनका खुशीमे अप्पन खुशी
शास्त्रकेर उपदेश एतबे
परोपकारे पुण्य बाढ़य ।
जे कियो परपीड़दायक,
पाप तकरा ध' पछाड़य ।।
कर्मफल सिद्धांत अविचल
जेहन करनी तेहन भरनी ।
नीक के फल नीक आ
अधलाह अधलाहेक जननी ।।
मुदा जे अनका खुशीमे
खुशी अपनो खूब पाबथि ।
चरण चूमथि खुशी तिनकर,
दुःख कोसो दूर भागथि ।।
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Sunday, September 3, 2023
चरित्र
छुइत जँ नै ज्ञानसँ तँ,
मनुज वा पशुमे की अन्तर!
शील गुणसँ रहित जँ तँ,
उभयमे बाजू की अन्तर!!
दीर्घतम रहितहुँ मुदा जँ,
पत्र-पुष्प विहीन तरुवर!
लैछ की आश्रय तकर पशु-
मनुज वा कोनो गगनचर!!
वृक्षके शोभा अतुल जँ,
फूल-फल-आ पात घनगर !
चरित-सद्गुण पत्र-पुष्पें-
मनुज-तरु हो महासुन्दर!!
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