Thursday, December 19, 2024

जे किछु अपना नीक लगै अछि ।

"जे किछु अपना नीक लगै अछि, अनको से सब परसू । जे नै नीक लगै अछि अपना, अनका जुनि से परसू ।। आमक तरुसँ झरकबाहि, जे गाछ बबूर लगयता, जिनगीभरि काँटे बिच रहता, आमकलेल तरसता!!!" ***************************

अपनापर बिसबास करू

अपनापर बिसबास करू, जुनि भागू देखि समस्याके । ईशक ध्यान धरू निसदिन, जुनि छोड़ू अपन तपस्याके ।। जुनि ताकू अनका दिस कहिओ, जे सदिखन आबि मदति करता । हँ, दोस्त एहन ताकू निश्चय, जे सभतरि संग सतति रहता ।। **************************

Sunday, November 10, 2024

ईशसँ अछि प्रार्थना ।

ईशसँ अछि प्रार्थना एतबा कृपा सदिखन करब । रहय ने दुखिया कियो आ दुख सभक सदिखन हरब ।। कष्ट किनको कनिकबो नै होन्हि हमरा कारने । भले हमरा देथु कतबो कष्ट ओ बिनु कारने ।। एहन दिन हमरा दिय' सभदिन करी उपकार अनकर । भले क्यो ऐ लोकके सदिखन करथु अपकार हम्मर ।। हएत जीवन सफल, जँ क्यो- सुखी हमरा कारने । दोसर मुख मुस्कान आयत जखन हमरा कारने ।। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

Monday, July 15, 2024

माया बनाम ज्ञान

"जे कियो मायाक पाछाँ रहत लागल, होइछ नै तकरासँ नमहर कियो पागल । आइ तक नै कियो ओकरा पकड़ि सकला, महा अज्ञानी थिका से नर अभागल ।। जे कियो पग सूर्य दिस प्रारंभ करता, रहत लागल तनिक पाछाँ छाँह हुनकर । होउ सब जिज्ञासु उन्मुख ज्ञान रवि दिस, स्वयं सुख-समृद्धि पाछाँ रहत तिनकर ।।" *************************

Wednesday, July 10, 2024

नारि

"सहस्रों पुष्प मिलिजुलिक' सुधर माला बनाबै छथि,
सहस्रों दीप मिलिक' आरतिक थारी सजाबै छथि ।
अनंतों बूँद मिलिजुलिक' करथि निर्माण सरिता के,
मुदा एसगरि सुशीला स्वर्ग सम घर के बनाबै छथि ।।
भले सम्पन्नता सुख-शान्तिमय परिवार किनको छन्हि,
भले साक्षर नीरुज बलबान सब लक्षण विकासक छन्हि ।
मुदा जँ नारिके सम्मान नै ओइ गेहमे होइ छन्हि,
तँ नर्के सदृश बूझू गेह से पहरा विनाशक छन्हि ।।"

Wednesday, July 3, 2024

आत्म दर्शन

ताकै छी मस्जिद गुरुद्वारा मंदिर चर्चो आ जगभरिमे । अनगिन जीवक दिस ध्यान दियौ, भ' जायत दर्शन क्षणभरिमे ।। घिरनासँ घिरने भेटै छै, सेवासँ मेवा प्राप्त करब । जँ दया प्रेम बिलहब सगरो, सबहक हिरदयमे बास करब ।। सेवो नै पूजा हो सबहक, शिवरूप बूझि सबके अइठाँ । एक्के ईश्वर सबहक उरमे, तँ आन कियो नै अछि अइठाँ ।। जँ पूजो नै क' सकय कियो, चुपचाप स्वयंमे पैस जाउ । चितके थिर क' इंद्रिय समेटि, भए मौन हृदयमे बैस जाउ ।।

Thursday, May 9, 2024

औंठी

बात बहुत पुरान थीक । सिंदरीमे अभियांत्रिकीक द्वितीय बर्खक छात्र छलहुँ । गर्मी छुट्टीमे गाम आयल छलहुँ । श्रद्धेय स्व0 परम भैया सेहो मोतिहारीसँ गाम आयल छलाह । ओ मोतिहारीक हनुमान सुगरमिल परिसर स्थित हनुमान मंदिरक पुजेगरी छलाह । हुनका संगें हुनक एकटा पैघ मारवारी मित्र सहो आयल छलन्हि । नाम तँ याद नहि अछि, किछु काल लेल मानि लीय' "चौखानी" । हमरासँ तीन दिन पहिने परम भैया आ चौखानी आयल छलाह । तीन दिनमे चौखानी खूब लोकप्रिय भ' गेल छल । चौक-चौराहा, कलम गाछी सागरो घुमैत छल । ओकरा संगे हरदम दस-बीस टा लोक रहैत छलैक । चाह-पान, हाहा-हीही खूब होइत छलैक । हम एलहुँ तँ दरबज्जापर ओकरासँ भेट भेल। परिचय भेल आ हल्का-फुल्का बात भेल । हमरासँ भेट होइत देरी पता नै की जादू भेलैक जे ओ आब हमरा बिना कतहु जेबे ने करय । हमरा बुझाइछ जे यद्यपि ओ गामक लोकसबसँ घुलि-मिलि गेल छल तथापि ओकरा असुरक्षा बोध हरदम रहैत छलैक । ओकरा संग हरदम रह'बलामे सदानंद, महारुद्र, पवन, चन्द्रनाथ, नंदू .. आदि अनेक लोक छलथिन्ह । एहन-एहन अवधूत सबहक बीच ओ परदेशी सीधा-सादा चौखानी कृत्रिम प्रसन्नता देखबैत रहैत छल । हमरासँ भेट होइत देरी ओकरा जानमे जान एलैक । ओ एक दिन हमरा संग एकांतमे दोस्तीक बंधन जोड़लक आ एकटा हीरा जड़ित सोनाक औंठी आँगुरमे पहिरा देलक । भ' सकैत अछि ओकरा समाजमे अहिना दोस्ती लगेबाक प्रथा छल हेतैक, हम शुद्ध ग्रामीण मैथिल समाजमे पलल एकटा अकिंचन विप्र ऐ प्रथासँ साफे अनभिज्ञ अकचकायले रहि गेलहुँ । हमरो किछु देबाक चाही ई सोचबो नै केलहुँ । हँ, एकटा बात मोनमे आयल जे संभवतः हेरेबाक वा चोइर हेबाक डरे ओ हमरा लगमे अपन मूल्यवान धरोहर बिसबास क' क' राखि देलक अछि जे जयबाक काल तक सुरक्षित रहैक । आब चौखानीक मुखपर प्राकृतिक खुशी लौटि गेल छलैक । आब ओ निश्चिंत भ' डोकहर, कपलेसर, खजौली, सुक्खी, उचैठ, कलुआही, मधुबनी.. सौंसे घुमैत रहैत छल । ओ खूब नीक हरमुनियाँ बजाबय आ गीतो खूब नीके गबैत छल । आमक गाछीमे ओकर उन्मुक्त हँसी वर्णनातीत रहैत छल । एक मास ओ रहल, कोना ओ एक मास बीति गेल किछु नै बुझायल । ओ जखन बिदा भेल तँ हम धधहरा गाछीमे छलहुँ । हमरा दिमागमे छल जे ओ भोजनोपरांत बिदा होयत, मुदा ओ जलखै क' क' बिदा भ' गेल । पता चलल जे जाइतकाल ओ हमार खोज केने छल । हमर मोन छटपटा उठल । हम बिना जलखै केनहिं कलुआही लेल दौड़ि पड़लहुँ । बाबू मनो केलनि जे कत' ढोंर हाँक' जायब, ओ चलि गेल होयत । मुदा हमरा किछु नै सुनायल । दौड़ते-दौड़ते कलुआही पहुँचलहुँ । संजोग देखू जे बस लेट छलैक । चौखानी बसमे बैसि गेल छल । बस एक मिनटमे खुज'बला छलैक, सीटी द' देने छलैक । हम चौखानी लग जाक' उदास मोने ओकरासँ हाथ मिलेलहुँ आ आँगुरसँ औंठी निकालि ओकरा द' देलिऐक । ओ खुश भ'क' ल' लेलक आ हम तेजीसँ उतरि गेलहुँ । भगवान हमर इज्जति बचौलन्हि । पता नहि ओ हमरोलेल की की सोचैत छल होयत! गामपर आबि निसाँस छोडलहुँ । बाबू पुछलाह- "भेटल की नहि"? कहलियन्हि-"हँ, भेटि गेल" । मुदा,हुनका कहाँ बूझल छलन्हि जे हमरा माथक बड़का बोझ उतरि गेल छल!! ओ घटना एखनो ओहिना याद अछि ।