Monday, August 28, 2023
काज तेहने करी जे मुइलो पर लोक याद करय
होइछ विदा जखने क्यो जग सँ,
फेकल जाइछ हुनक सब पहिरन ।
गेरुआ चद्दरि सीरक कम्मल
गमछा डोपटा पनही अचकन ।।
क्यो नहि फेकय ढ़उआ-कौड़ी,
सोना-चानी लेल लड़य सब ।
महल-अटारी गाड़ी-घोड़ा,
हीरा-मोती लेल लड़य सब ।।
बूझि लिय' अछि महतु कथी केर,
हार-गरदनिक क्यो नहि त्यागत ।
भरल तिजौरी के सब नगदी,
झटपट लूटि लोक सब भागत ।।
लूटत सबटा बस्तु-जात सब,
किछुओ नहि रहि पायत बाँचल ।
दान-पुण्य सँ अरजल जे अछि,
सैह मात्र रहि जायत बाँचल ।।
माथक केस जरै अछि तृण सम,
काठक सम हड्डी जरि जायत ।
सुन्दर गात जरत तूरक सम,
वस्तु कथू संगमे नहि जायत ।।
शास्त्रक ज्ञान- "कियो नहि ककरो",
व्यवहारो मे देखा देलक अछि ।
छोड़ाक' खोंइचा नग्न सत्य के,
आबि करोना सिखा देलक अछि ।।
ख्याति बचय ककरो नहि धन सँ,
कीर्तिक कारण नाम रहय ।
काज करी तैं तेहने सब क्यो,
मरलो पर सब याद करय ।।
मरलो पर सब याद करय !!!!
********************************
Thursday, August 24, 2023
अपनेसँ हारय सब
सगर दुनियाँ छानि किओ,
सुन्नर खोंता बनौलक ।
सबके पछाड़िक' किओ,
दिग्गज बड़का कहौलक ।।
दिग्गज बड़का कहौलक,
जोश मुदा टूटि गेलै ।
अपनहिं लोक जखन,
ओकरा नै चीन्हि पेलै ।।
कियो नै रहस बूझय,
गजबे अछि हमर दुनियाँ ।
अपने सँ हारय सब,
जीतय भले सगर दुनियाँ ।।
-------/---------------/------------
Wednesday, August 23, 2023
सत्यक साबुन
गन्दगी सँ जगतमे
घिरना देखाबथि सकल जन,
तेल साबुन लगा इत्रें
सुवासित राखथि अपन तन ।
बाह्य यद्यपि स्वच्छ, पर-
अन्तर हुनक कालिख भरल,
किअए ने सत्येक साबुन
लगा राखथि स्वच्छ मन ।।
अध्यात्म के आधार जगमे
स्वच्छ मोने टा रहथि ।
यएह तरणी होइछ जै सँ
मनुज भवसागर तरथि।
यएह बाहर जाय क'
संसार के सर्जन करथि,
स्रोत पर सुस्थिर भेने तँ
स्वयं ई आत्मा बनथि ।।
******************************
Sunday, August 20, 2023
न्यायक नै छूति अछि ।
सबठाँ धृतराष्ट्रे भरल,
न्यायक ने छुइत अछि ।
भीष्म द्रोणों मौन धएने,
दुर्योधनक जुइत अछि ।।
दुर्योधनक जुइत अछि,
कुशासने चीर हरलक ।
कोना लाज बाँचत,
प्रशासने स्वांग रचलक ।।
युवा-भीम उठू झट,
पिशाचे पसरल सबठाँ ।
चीरू छाती ओकर,
दुशासने सबल सबठाँ ।।
------कमलजी------
*************************
भेटल कर अछि दान करक लेल
भेटल कर अछि दान करक लेल,
लेबक लेल अछि ज्ञान ।
लोभ मोह क्रोधे असली रिपु
त्याग करू अभिमान ।।
अपना पर बिसबास,
ने आनक आश हो कहियो ।
मात्र निराशे होयब,
पूर्ण ने काज हो कहियो ।।
कत्तहु भेटत घिरना,
कत्तहु वर्षा स्नेहक ।
सम भावे थिक उत्तम,
ध्यान धरू जगदीशक ।।
**************************
Saturday, August 19, 2023
राम तोरे आसरय
राम बिन ककरो ने गति अछि,
राम मम दाता-शरण ।
राम कलिकेर दोष नाशक,
रामके हम्मर नमन ।
रामसँ भय खाथि कालो,
सकल जगते राममय ।
राममे हो भक्ति अविचल,
राम तोरे आसरय ।।
*************************
Thursday, August 17, 2023
आन्तरिक सौंदर्य
लट्टू जुनि होथु कियो,
लखि बाह्य सौंदर्य टा ।
नहि खोलय भीतरक भेद,
दैहिक सौंदर्य टा ।।
दुष्टो सब शुभ्र-शाभ्र,
चेला अछि मूड़ि रहल ।
ओढ़िक' साधुक खोल,
भेड़िया सब घूमि रहल ।।
मोर बड्ड सुन्दर अछि,
नाचय सेहो खूब सुन्दर ।
गहुमन के खाइछ खूब,
भरल छैक जहरि अन्दर ।। ।।
Subscribe to:
Posts (Atom)