Wednesday, August 16, 2023

दृश् प्रपंचक मूल ईशे

दृश् प्रपंचक मूल ईशे, वैह जगतक सकल कर्ता । स्रोत ओ आनन्द के छथि, वैह तँ छथि विघ्न-हर्ता ।। अपना बसमे किछु ने ककरो, झूठ-मूठके गुड़िया गाँथय । जीव सकल कठपुतली जगमे, जेना नचाबथि तहिना नाचय ।। जेना ट्रेनमे चढ़िते देरी, माथक मोटरी सेहो रखै छी । सबटा भार दियनु हुनके पर, व्यर्थक चिन्ता किए करै छी । बहुत प्रबल अछि गाल काल केर, सबके एकदिन निश्चय खायत । ईशक हाथ जनिक माथा पर, कालक भय के दूर भगायत ।। *******************************

Saturday, August 12, 2023

विचारक सर्वोच्चता आ क्रियाके प्रतिबद्धता

सर्वोच्चता हो विचारक, क्रिया के प्रतिबद्धता । ततहिं हो श्री जय विभूति, सुनीतिक हो शास्वता ।। सुनीतिक हो शास्वता, हरिनाम पापक नाशकर्ता । स्मरण हर्षक प्रदाता, ओ थिका त्रय तापहर्ता ।। प्राप्ति हो सद्ज्ञान के, आ नष्ट हो सब अज्ञता । सकल संशय दूर हो, आ प्राप्त हो सर्वोच्चता ।। **********************

Friday, August 11, 2023

सहनशीलता

सहनशील बनू किऐक त' अहूँ मे असंख्य कमी अछि जकरा लोक बरदास्त क' रहल अछि । श्रेष्ठ वैह थिक जे दृढ़ अछि मुदा जिद्दी नहिं, बहादुर अछि मुदा हड़बड़िया नहिं, दयावान् अछि पर कायर-निर्बल नहिं, ज्ञानी अछि पर अहंकारी नहिं, जकरा करुणा छैक मुदा प्रतिशोधक भाव नहिं, जकरा निर्णयक शक्ति छैक मुदा ओ कन्फ्यूज्ड नहिं अछि । जँ कियो अहाँक दयालुता, करुणा, प्रेम के अहाँक कायरता बुझैत छथि त' ई हुनकर समस्या छन्हि, अहाँक नहिं ।

Thursday, August 10, 2023

सुप्रभातम्

सुप्रभातम् हे सुहृद! अहींस' जिनगी रंगीन अछि । भोरे-भोर जँ हालचाल नै भेल जिनगी रंगहीन अछि ।। भले भेट ने मुलाकात, मुदा हृदयकेर पुकार, ने कोनो लोभ आ ने स्वार्थ मात्र उरकेर उद्गार!! सुस्वागतम् हे सुहृद! हमर सौभाग्य अप्रतिम भेल । सुहृदक कुशल- समाचार- भोरे-भोर प्राप्त भेल!!! छलकैछ उरसँ उद्गार, खुशीक नै पारावार! हार्दिक अभिनंदन हार्दिक आभार!!!! *🙏🌹*सुप्रभात* 🌹🙏

मोन नहि कखनो खाली

खाली राखब मोन तँ, भरि जायत शैतान । जँ ने रोपल खेत के, घास-फूस खरिहान ।। घास-फूस खरिहान, करी नीके नित चिन्तन । व्यर्थ ने मन हो खिन्न, रही हँसिते सब अनुखन ।। नीके राखी सोच, नकारा के जुनि पाली । चिन्तन नित अध्यात्म, मोन नहि कखनो खाली । ************************

Tuesday, August 8, 2023

आंतरिक शत्रु थिक असली शत्रु

क्यो ने ककरो मित्र आ ने शत्रु जन्मे सँ रहय । स्वयं के व्यवहार सँ क्यो दोस्त वा दुश्मन बनय ।। आंतरिक अछि शत्रु असली बाह्य रिपु के किछु ने मोजर । क्रोध घिरना लोभ लालच काम मोहे होइछ जोरगर ।। एके ईश्वर सभक उरमे आन क्यो नहि रहय जगमे । स्वयं सँ के करत घिरना प्रेम सबसँ रहय जगमे ।। दोष अप्पन क्यो लखय नहि मनुखमे बड़का अगुण अछि । अपन दोषो के ओ अनके माथ मढ़बा मे निपुण अछि ।। अपन जीवन के दुखी- त्रासद स्वयं अपने बनाबी । शत्रु हम्मर दोष अपनहि, नाम हम अनकर लगाबी ।। सब जँ अप्पन अवगुणे लखि, मेटाब' मे लागि जायत । गुणे अनकर जँ देखय तँ, स्वर्ग धरणी के बनायत ।। स्वर्ग धरणी के बनायत!!! ***************************

Tuesday, August 1, 2023

ईशसँ किछुओ ने माँगू

साधु लग गेले सँ भेटय- शान्ति मोनक बिना मँगनहिं । सेंट बिक्रेता सुवासित- करय परिसर बिना किननहिं ।। सरित बिन मंगनहिं प्रदानथि- वारि, जखनहिं ल'ग जायब । ल'ग सद्वृक्षक गेलहिं सँ, बिना मंगनहिं फ़'ल पायब ।। बर्फ के नजदीक गेनहिं, महाशीतलता भेटै अछि । अग्नि लग मे जाइत देरी, लोक गरमाहटि पबै अछि ।। प्राणवायुक दान अपनहिं- करै छथि सदिखन पवन । लोक के कल्याण खातिर, धरणि अपनहिं दैछ अन्न ।। ईश सँ किछुओ ने माँगू, निकट गेनहिं भेटय सब किछु । करू निज कर्तव्य, सबसँ- प्रेम केनहिं, भेटय सब किछु ।। *****************************