Saturday, July 15, 2023
माया आओर ज्ञान
जे कियो दौड़ैत रहता
मायाक पाछाँ,
से ने कहियो किमपि
ओकरा पकड़ि सकता ।
रहत लागल तनिक पाछाँ
छाया हुनक,
चलब जे कियो सूर्य दिस
प्रारम्भ करता ।।
सुधीगण! संसार दिस नै
भागल करू तएँ,
होउ उन्मुख जिज्ञासुगण!
निज स्रोत रवि दिस ।
तनिक पाछाँ रहत लागल
संसार(सुख, समृद्धि) अपनहि,
चलब जे प्रारंभ करता
ज्ञान(सूर्य, प्रकाश) दिस ।।
Friday, July 14, 2023
सत्यवादी भक्त
घाव ककरो करब अछि आसान बहुते,
लगायब मलहम बहुत होबैछ मोसकिल ।
कष्ट पहुँचायब तँ जानय लोक सबटा,
आर्त के दुःख दूर कर्ता भेटब मोसकिल ।।
कोनोटा सम्बन्ध नै बड़ पैघ जगमे,
निभायब सम्बन्ध होबय बहुत मोसकिल ।
कर' मे आसान अछि अपकार ककरो,
कर' मे उपकार जगमे बहुत मोसकिल ।।
याचकक तँ छोड़ लागल देखब सगरो,
दानकर्ता के भेटब अछि बहुत मोसकिल ।
जान लेबक लेल भेटत लोक सबतरि,
जान देब'बला भेटब बहुत मोसकिल ।।
जतय जायब लालचीके यूथ पायब,
निलोभी त्यागी के भेटब बहुत मोसकिल ।
टोप-टहंकारी आ ढोंगी भेटत सबतरि,
सत्यवादी भक्त ज्ञानी भेटब मोसकिल ।।
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Wednesday, July 12, 2023
मात्र ईशक आश
बात-ज्ञानक डाङ बिपतिक
धैर्ज ध' क' सहू प्रतिदिन ।
जखन घूरत नीक दिन तँ,
भाग जागत अहुँक एकदिन ।।
भाग जागत अहुँक एकदिन,
मौन मुख के सतत राखू ।
स्नेह हो सकले जगत सँ,
नहि अनर्गल वचन भाखू ।।
मात्र ईशक आश, कहियो-
बिसरियो नहि आश आनक ।
यैह थिक भाखथि 'कमलजी'
पैघ सबसँ बात-ज्ञानक ।।
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Tuesday, July 11, 2023
लक्ष्य
जरूरी नै लकीरेके
फकीरे बनले रही,
जरूरी नै हम पुरनके
लीक ध' चलिते रही ।
जरूरी नै परिस्थितिके
अहर्निश कोसिते रही,
जरूरी अछि कोनहुना हम
लक्ष्य दिस चलिते रही ।।
लैछ बहुतो लोक निर्णय
परिस्थितिए देखिक',
सफलतम किछु सुविग सदिखन
चलथि लक्ष्ये पेखिक' ।
दिशा पवनक बदलबाके
छैक नै सामर्थ्य ककरो,
हर्ज की तरणीक मुख जँ
करी लक्ष्ये देखिक'!!!
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Monday, July 10, 2023
अज्ञता
अज्ञता अछि विपत्तिक जड़ि,
अहंता जड़िसँ नशाबय ।
ज्ञान सबसँ पैघ नौका,
पार भवसागर लगाबय ।।
पार भवसागर लगाबय,
वित्त क्षय किछु ने बिगाड़य ।
चरित्रक बल उन्नतिक जड़ि,
आत्मबल सभतरि उबाड़य ।।
गुरु थिका निज आतमा आ
मौन थिक सद्शिष्यता ।
मोन आत्मविलीन होइतहिं,
पड़ायत सब अज्ञता ।।
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Sunday, July 9, 2023
अवज्ञा नै करी ककरो
अपने जिनक स्वागत करब,
से घुरिक' अयता फेरसँ ।
उपेक्षा जिनकर करब, से
घुरि ने अयता फेरसँ ।।
घुरि ने अयता फेरसँ,तएँ-
अवज्ञा नै करी ककरो ।
अनेरे आयल करत से,
कहाँ फुरसति छैक ककरो ।।
आबिक' हरि घुरि जेता,
नै जानि केहनो भेष धयने ।
घुरि ने अयता फेर सँ ओ,
लाख पटकब माथ अपने ।।
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Saturday, July 8, 2023
अहंता अज्ञानता थिकि ।
अहंता अज्ञानता थिकि,
बुद्धि के छथि नाशकर्त्री I
क्रोध, मोहक जन्मदात्री,
विवेकक अपहरणकर्त्री II
विवेकक अपहरणकर्त्री,
मनुजता के मृत्युदात्री I
दोख दुर्गुण वृद्धिकर्त्री,
मनुख के गर्तक प्रदात्री II
गुमानक करु त्याग, सुन्दर-
देह एकदिन जाय जरता,
चिता भूमिक करी दर्शन,
जखन क' आबय अहंता II
मानू नै संबंध टूटत,
जँ अहं-बीया ने जनमत ।
फ़सल संबंधोक उपटत,
जँ गुमानक ख'ढ़ पनपत ।।
जँ गुमानक ख'ढ़ पनपत,
दहिन मे उधियाय लागत ।
काल के गति क्यो ने जानय,
क्षणे मे भसियाय जायत ।।
बाम दिन मे सब्र राखू,
दहिन मे छाती ने तानू ।।
प्रेम सबदिन रहय उर मे,
क्षमा के ब्रह्मास्त्र मानू ।।
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