Saturday, July 8, 2023

जे जैह रोपत सैह काटत ।

जायत ने संगमे कथू, जे जैह रोपत सैह काटत । स्वयं भोग' पड़य सब किछु, आन नहि क्यो दुक्ख बाँटत ।। आन नहि क्यो दुक्ख बाँटत, दर्द अनकर बाँटि ली । चारि दिवसक जिंदगी अछि, हँसि-खेलाक' काटि ली ।। यैह गिट्ठ' बान्हि ली जे, भलाकर्ता भला पायत । एक नेकी छोड़िक', संगमे ने कथू जायत ।। ************************************

Friday, July 7, 2023

नाटक

नाटक टा भ' रहलै जगमे, बूझथि क्यो नहि सत्य । असली बात बिसरि क' सब क्यो, असते बूझथि सत्य ।। असते बूझथि सत्य, झूठमे लागल सब क्यो । कानि रहल अछि सत्य, झूठ लेल पागल सब क्यो ।। राति-दिन सब व्यस्ते, मायालेल सब त्राटक । खुश रहबाक ने फ़ुरसति, मुसकयबो थिक नाटक ।। *************************

Wednesday, July 5, 2023

श्रेष्ठता नै जन्मसँ हो ।

भले हो प्रतिकूलता, अनुकूल ओ तकरा बनायत । ठाइन लेलक जँ मनुख तँ, किछु ने किछु क' क' देखायत ।। किछु ने किछु क' क' देखायत, श्रेष्ठता नहि जन्म सँ हो । निपुणता आ श्रेष्ठता गुण आ कला, निज कर्म सँ हो ।। दूध डाढ़ी दही मक्खन घृतादिक गुण होइछ अलगे । दाम भिन्ने रहय सबहक, सब एकहि कुल के भले ।। ********************************

Tuesday, June 20, 2023

आत्मस्थताक आनंद

धाह कतबा सहथि रवि के कहि सकत ? स्वयं जरिक' प्रकाशित जग के करत? भ' सकय उपकार नहि बिनु कष्ट सहने, दीप तम भगबय जखन अपने जरत ।। प्रशव-पीड़ा माय केर के बुझि सकत ? गलाक' निज देह सर्जन के करत? भूखके पीड़ाक की अनुभव हो तकरा? स्वर्ण चम्मच मुखमे जे जनमल रहत ।। मरु-तृषित मृग देखितहि- जल मुदित कतबा? के विरहिणी प्रियमिलन सुख नापि सकता? प्रथम बरखा-बुंद टा चाहैछ चातक, के चकोरी-चन्द्रके उर थाहि सकता?? जे ने चिखलक, स्वाद- मिसरिक की कहत? स्वादियो वरनब मिठासक के सकत ? आत्मस्थित सुखक हो आनंद अनुपम, हृदय सुस्थित भेनहि अनुभव भ' सकत!!! ***********************??***** *************************

Monday, June 19, 2023

पाकिटमार - 2

पाकिटमार- 2 ************** एक बेर पटना सँ दिल्ली जयबाक छल । पटना जंक्शनपर विक्रमशिला एक्सप्रेसमे चड़हैत काल ततेक धक्का-मुक्की भेल जे मोन चंग भ' गेल । पाकेटमारसब कृत्रिम भीड़ उत्पन्न करैत अछि जाहिसँ जेबी काट'मे सुविधा होइत छैक । गेटसँ भीतर गेला पर बेसी भीड़ नै बुझायल । रगड़ा-रगड़ीमे जोड़ लगाक' अन्दर गेलहुँ तँ किछु रुपैया खसल देखलिऐक । रुपैया उठाक' सबस' पूछ' लगलिऐक जे किनकर छन्हि मुदा कियो नै बजलाह । हम सोच' लगलहुँ जे लोको सब कतेक लापरवाह होइत छथि जे अपन रुपइयो-पैसोके सम्हारिक' राखल नै होइत छन्हि आ नाहकमे पाकिटमारसबके बदनाम करैत रहैत छथिन्ह । तखनहिं एकटा व्यक्ति कहैत छथि जे श्रीमान् कने अप्पन जेबी के सेहो चेक क' लेल जाय । हुनका बजिते हाथ जेबी पर गेल । अरे ई की! हमर जेबी नदारद अछि! ई तँ हमरे रुपैया थिक आ हम अनका पूछैत छियैक! पाकिटमार जेबी तँ काटि लेने छल मुदा हड़बड़ीमे रुपैया नीचामे खसि पड़ल छलैक । जानमे जान आयल । रुपैया तँ कमसँ कम भेटि गेल! जेबी तँ फेरो सिया लेल जेतैक!! ***************************************

द्रष्टा बनि जीबी ऐ जगमे

जगमे जे क्यो जन्म लैत अछि, एक दिन होयत बूढ़ अबस्से । देह मनुक्खक व्याधिक मंदिर, एक दिन होयत मृत्यु अबस्से ।। एक दिन होयत मृत्यु अबस्से, भले नृपति वा रंक रहय क्यो । जनितो ऐ सत्यक रहस्य, नै- धरती पर स्वीकार करय क्यो ।। दुनियाँ अहिना चलत निरन्तर, अजर-अमर क्यो नहि ऐ जगमे । आयब-जायब लगले रहतै, द्रष्टा बनि जीबी ऐ जगमे ।। **************************

Tuesday, June 6, 2023

आचार

आचारक शिक्षण बिना, कदाचार जनमैछ । बौद्धिकता यद्यपि बढ़य, अहंकार बढ़बैछ ।। अहंकार बढ़बैछ, सत्य स्नेहक हो शिक्षण । त्याग तपस्या सदाचार के होय प्रशिक्षण ।। आदर श्रेष्ठक स्नेह छोटसँ, नीक बेजाय विचार । नैतिकता के पाठ पढ़ाबी, संस्कृत हो आचार ।। **********************