Friday, July 7, 2023

नाटक

नाटक टा भ' रहलै जगमे, बूझथि क्यो नहि सत्य । असली बात बिसरि क' सब क्यो, असते बूझथि सत्य ।। असते बूझथि सत्य, झूठमे लागल सब क्यो । कानि रहल अछि सत्य, झूठ लेल पागल सब क्यो ।। राति-दिन सब व्यस्ते, मायालेल सब त्राटक । खुश रहबाक ने फ़ुरसति, मुसकयबो थिक नाटक ।। *************************

Wednesday, July 5, 2023

श्रेष्ठता नै जन्मसँ हो ।

भले हो प्रतिकूलता, अनुकूल ओ तकरा बनायत । ठाइन लेलक जँ मनुख तँ, किछु ने किछु क' क' देखायत ।। किछु ने किछु क' क' देखायत, श्रेष्ठता नहि जन्म सँ हो । निपुणता आ श्रेष्ठता गुण आ कला, निज कर्म सँ हो ।। दूध डाढ़ी दही मक्खन घृतादिक गुण होइछ अलगे । दाम भिन्ने रहय सबहक, सब एकहि कुल के भले ।। ********************************

Tuesday, June 20, 2023

आत्मस्थताक आनंद

धाह कतबा सहथि रवि के कहि सकत ? स्वयं जरिक' प्रकाशित जग के करत? भ' सकय उपकार नहि बिनु कष्ट सहने, दीप तम भगबय जखन अपने जरत ।। प्रशव-पीड़ा माय केर के बुझि सकत ? गलाक' निज देह सर्जन के करत? भूखके पीड़ाक की अनुभव हो तकरा? स्वर्ण चम्मच मुखमे जे जनमल रहत ।। मरु-तृषित मृग देखितहि- जल मुदित कतबा? के विरहिणी प्रियमिलन सुख नापि सकता? प्रथम बरखा-बुंद टा चाहैछ चातक, के चकोरी-चन्द्रके उर थाहि सकता?? जे ने चिखलक, स्वाद- मिसरिक की कहत? स्वादियो वरनब मिठासक के सकत ? आत्मस्थित सुखक हो आनंद अनुपम, हृदय सुस्थित भेनहि अनुभव भ' सकत!!! ***********************??***** *************************

Monday, June 19, 2023

पाकिटमार - 2

पाकिटमार- 2 ************** एक बेर पटना सँ दिल्ली जयबाक छल । पटना जंक्शनपर विक्रमशिला एक्सप्रेसमे चड़हैत काल ततेक धक्का-मुक्की भेल जे मोन चंग भ' गेल । पाकेटमारसब कृत्रिम भीड़ उत्पन्न करैत अछि जाहिसँ जेबी काट'मे सुविधा होइत छैक । गेटसँ भीतर गेला पर बेसी भीड़ नै बुझायल । रगड़ा-रगड़ीमे जोड़ लगाक' अन्दर गेलहुँ तँ किछु रुपैया खसल देखलिऐक । रुपैया उठाक' सबस' पूछ' लगलिऐक जे किनकर छन्हि मुदा कियो नै बजलाह । हम सोच' लगलहुँ जे लोको सब कतेक लापरवाह होइत छथि जे अपन रुपइयो-पैसोके सम्हारिक' राखल नै होइत छन्हि आ नाहकमे पाकिटमारसबके बदनाम करैत रहैत छथिन्ह । तखनहिं एकटा व्यक्ति कहैत छथि जे श्रीमान् कने अप्पन जेबी के सेहो चेक क' लेल जाय । हुनका बजिते हाथ जेबी पर गेल । अरे ई की! हमर जेबी नदारद अछि! ई तँ हमरे रुपैया थिक आ हम अनका पूछैत छियैक! पाकिटमार जेबी तँ काटि लेने छल मुदा हड़बड़ीमे रुपैया नीचामे खसि पड़ल छलैक । जानमे जान आयल । रुपैया तँ कमसँ कम भेटि गेल! जेबी तँ फेरो सिया लेल जेतैक!! ***************************************

द्रष्टा बनि जीबी ऐ जगमे

जगमे जे क्यो जन्म लैत अछि, एक दिन होयत बूढ़ अबस्से । देह मनुक्खक व्याधिक मंदिर, एक दिन होयत मृत्यु अबस्से ।। एक दिन होयत मृत्यु अबस्से, भले नृपति वा रंक रहय क्यो । जनितो ऐ सत्यक रहस्य, नै- धरती पर स्वीकार करय क्यो ।। दुनियाँ अहिना चलत निरन्तर, अजर-अमर क्यो नहि ऐ जगमे । आयब-जायब लगले रहतै, द्रष्टा बनि जीबी ऐ जगमे ।। **************************

Tuesday, June 6, 2023

आचार

आचारक शिक्षण बिना, कदाचार जनमैछ । बौद्धिकता यद्यपि बढ़य, अहंकार बढ़बैछ ।। अहंकार बढ़बैछ, सत्य स्नेहक हो शिक्षण । त्याग तपस्या सदाचार के होय प्रशिक्षण ।। आदर श्रेष्ठक स्नेह छोटसँ, नीक बेजाय विचार । नैतिकता के पाठ पढ़ाबी, संस्कृत हो आचार ।। **********************

Wednesday, May 24, 2023

गामक भ्रमण

आइ गाममे पुबारीभागक जलपा कलम दिस प्रातःकालीन भ्रमण पर निकललहुँ । बाध दिस जमाना पर गेल छलहुँ । बाल्यकालक संस्मरण जाग्रत भ' उठल । ब्रह्मस्थान, खबासक पोखरि, ककरियाही, गजारी बाध आ जलपा कलम.... आदिक एक-एक बात ओहिना याद अछि । एखन जूरसितल 14-15 अप्रैल क' बीतल अछि, गाममे कोनो जीवंतता नहि बुझायल । पहिने जूरसितल दिन भोरे सँ चहल-पहल रहैत छल, जुड़ाब'बाली बुड़हीसब सुतले सँ जुड़बैत छलीह, ऐ बेर किछु नै बुझायल । पूर्वमे लोकसब चौकी, पलंग, खाट, केबार, खाट, सफरी, कुर्सी-टेबुल... सबके पोखरिमे डुबाक' ख़ूब नीकसँ साफ करैत छलाह । सब गाछक जड़िमे जल द' जुड़बैत छलाह, कियो-कियो किछु खानापूर्ति करैत बुझयलाह । तकर बादक तँ कोनो कार्यक्रमे ने देखलहुँ । गोबर-माटि-गदौस-थाल-कादो सबहक तँ कोनो नामे ने! ने युवावर्गक जोस आ ने उमंग, रस्ता सबहक सफाइयो नै भेल । दुपहरमे खबासक पोखरिमे दछिनबारि टोल आ उतरबारि टोलक बीच पाइन-पाइनक खेल होइत छल, प्रतिपक्षीके बिना हरदा बजेने नै छोड़ैत छल, सबहक आँखि लाल-लाल भ' जाइत छल । पाइन झोंकब प्रतियोगिताक बाद उतरबरिया भीरपर ब्रह्मबाबाक प्रांगणमे दुनू टोलक कुश्ती प्रतियोगिता होइत छल । तत्पश्चात् बेरूपहर लोक शिकार खेलाय जाइत छल । गामक उत्तरभाग तथा दक्षिणभागमे करपुर वा दोस्तपुर संगे फ्रेंडली ढेपाउज होइत छल । मुदा कहियो काल बेसी झगड़ा भ' जाइत छल । मुदा आब किछुओ नै होइत अछि । ओना एकटा बात तँ नीके भेल जे शिकार आ ढ़ेपाउज बन्द भ' गेल, जीव-जन्तुक हत्या पर प्रतिबंध तँ छैके तएँ ओकर अनुपालन करब अनिवार्य अछि । ढ़ेपाउज ततेक विभत्स रूप ल' लेने छल जे भाला, गणास, तीर सब चल' लागल छल आ लोकसब घायल होम' लागल छल । बेल्हबाड आ नाजिरपुरमे तँ भाला लगला सँ मरबाक दुर्घटनातक सुनने छलहुँ । हलाँकि गोबर-माटि, पाइन-पाइन, कुस्ती-कुस्ती... प्रतियोगितासबसँ जीवन्तता बुझाइत छल । आजुक धीया-पुतासबकें तँ ई बात सब खिस्सा-पिहानी आ असभ्यता जेकाँ बुझेतनि । मुदा जिनगीके नैराश्यसँ बचेबाकलेल, आपसमे स्नेह बढ़ेबाक लेल आ जीवन्तता बनल रहबाक लेल पाबनि-तिहारक क्रियाकलाप आवश्यक रहैछ । तकरा अभावमे शहरी स्वार्थपरता, एकाकीपन आ नैराश्य गामोमे पइस रहल अछि जे गामोसबके शहरे जेकाँ बना देत जत' लोकके बरखो-बर्खतक पड़ोसियोसँ परिचय नै रहैत छैक । ब्रह्मस्थानक चर्च आयल अछि । हमरा गामक ब्रह्म बहुत जाग्रत आ परोपकारी छलाह । भूत-प्रेतक प्रकोप, कोनो तरहक बेमारी, चोइर-डकैती.... इत्यादि सबहक निदान ब्रह्म क' दैत छलाह । साँझखनक' चौपारि पर परोपट्टाक फरियादीसबहक मेला लागल रहैत छल आ सबहक समस्याक निदान ब्रह्म करैत छलथिन्ह । लगभग चौसठि बर्खसँ खबासक पोखरिक उतरबरिया भीरपर अवस्थित ब्रह्मस्थानमे नवाह संकीर्णतन भ' रहल अछि । खबासक पोखरिक चर्च भेल अछि । ई पोखरि करमौलीग्राम निवासी राजक खबास(स्व0 लछुमन खबास)क खुनाओल छन्हि । राज दड़िभंगा द्वारा लछुमन खबासके 1100 बिग्घा डोकहर मौजे भेटल छलन्हि । करमौलीसँ डोकहर भगवतीस्थानधरि खबास अनका जमीन पर पएर नै दैत छलाह । खबासेक विशालकाय पोखरिमे जूरसितलक पाइन-पाइन होइत छल । ककरियाहीक चर्च भेल अछि । ई बड्ड गँहीर डबरा अछि । सम्पूर्ण गामक माटि-माँगर(उपनयनक चुलहा हेतु...) अहीक माटिसँ होइछ । सम्भवतः,जखन गाममे पोखरि नै छल हेतैक तँ यएह सबहक आश्रय छल हेतैक ।