Friday, July 7, 2023
नाटक
नाटक टा भ' रहलै जगमे,
बूझथि क्यो नहि सत्य ।
असली बात बिसरि क' सब क्यो,
असते बूझथि सत्य ।।
असते बूझथि सत्य,
झूठमे लागल सब क्यो ।
कानि रहल अछि सत्य,
झूठ लेल पागल सब क्यो ।।
राति-दिन सब व्यस्ते,
मायालेल सब त्राटक ।
खुश रहबाक ने फ़ुरसति,
मुसकयबो थिक नाटक ।।
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Wednesday, July 5, 2023
श्रेष्ठता नै जन्मसँ हो ।
भले हो प्रतिकूलता,
अनुकूल ओ तकरा बनायत ।
ठाइन लेलक जँ मनुख तँ,
किछु ने किछु क' क' देखायत ।।
किछु ने किछु क' क' देखायत,
श्रेष्ठता नहि जन्म सँ हो ।
निपुणता आ श्रेष्ठता गुण आ
कला, निज कर्म सँ हो ।।
दूध डाढ़ी दही मक्खन
घृतादिक गुण होइछ अलगे ।
दाम भिन्ने रहय सबहक,
सब एकहि कुल के भले ।।
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Tuesday, June 20, 2023
आत्मस्थताक आनंद
धाह कतबा सहथि रवि
के कहि सकत ?
स्वयं जरिक' प्रकाशित
जग के करत?
भ' सकय उपकार नहि
बिनु कष्ट सहने,
दीप तम भगबय
जखन अपने जरत ।।
प्रशव-पीड़ा माय केर
के बुझि सकत ?
गलाक' निज देह
सर्जन के करत?
भूखके पीड़ाक की
अनुभव हो तकरा?
स्वर्ण चम्मच मुखमे जे
जनमल रहत ।।
मरु-तृषित मृग देखितहि-
जल मुदित कतबा?
के विरहिणी प्रियमिलन सुख
नापि सकता?
प्रथम बरखा-बुंद टा
चाहैछ चातक,
के चकोरी-चन्द्रके उर
थाहि सकता??
जे ने चिखलक, स्वाद-
मिसरिक की कहत?
स्वादियो वरनब मिठासक
के सकत ?
आत्मस्थित सुखक हो
आनंद अनुपम,
हृदय सुस्थित भेनहि अनुभव
भ' सकत!!!
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Monday, June 19, 2023
पाकिटमार - 2
पाकिटमार- 2
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एक बेर पटना सँ दिल्ली जयबाक छल । पटना जंक्शनपर विक्रमशिला एक्सप्रेसमे चड़हैत काल ततेक धक्का-मुक्की भेल जे मोन चंग भ' गेल । पाकेटमारसब कृत्रिम भीड़ उत्पन्न करैत अछि जाहिसँ जेबी काट'मे सुविधा होइत छैक । गेटसँ भीतर गेला पर बेसी भीड़ नै बुझायल । रगड़ा-रगड़ीमे जोड़ लगाक' अन्दर गेलहुँ तँ किछु रुपैया खसल देखलिऐक । रुपैया उठाक' सबस' पूछ' लगलिऐक जे किनकर छन्हि मुदा कियो नै बजलाह ।
हम सोच' लगलहुँ जे लोको सब कतेक लापरवाह होइत छथि जे अपन रुपइयो-पैसोके सम्हारिक' राखल नै होइत छन्हि आ नाहकमे पाकिटमारसबके बदनाम करैत रहैत छथिन्ह । तखनहिं एकटा व्यक्ति कहैत छथि जे श्रीमान् कने अप्पन जेबी के सेहो चेक क' लेल जाय ।
हुनका बजिते हाथ जेबी पर गेल ।
अरे ई की! हमर जेबी नदारद अछि!
ई तँ हमरे रुपैया थिक आ हम अनका पूछैत छियैक!
पाकिटमार जेबी तँ काटि लेने छल मुदा हड़बड़ीमे रुपैया नीचामे खसि पड़ल छलैक ।
जानमे जान आयल । रुपैया तँ कमसँ कम भेटि गेल! जेबी तँ फेरो सिया लेल जेतैक!!
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द्रष्टा बनि जीबी ऐ जगमे
जगमे जे क्यो जन्म लैत अछि,
एक दिन होयत बूढ़ अबस्से ।
देह मनुक्खक व्याधिक मंदिर,
एक दिन होयत मृत्यु अबस्से ।।
एक दिन होयत मृत्यु अबस्से,
भले नृपति वा रंक रहय क्यो ।
जनितो ऐ सत्यक रहस्य, नै-
धरती पर स्वीकार करय क्यो ।।
दुनियाँ अहिना चलत निरन्तर,
अजर-अमर क्यो नहि ऐ जगमे ।
आयब-जायब लगले रहतै,
द्रष्टा बनि जीबी ऐ जगमे ।।
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Tuesday, June 6, 2023
आचार
आचारक शिक्षण बिना,
कदाचार जनमैछ ।
बौद्धिकता यद्यपि बढ़य,
अहंकार बढ़बैछ ।।
अहंकार बढ़बैछ,
सत्य स्नेहक हो शिक्षण ।
त्याग तपस्या सदाचार
के होय प्रशिक्षण ।।
आदर श्रेष्ठक स्नेह छोटसँ,
नीक बेजाय विचार ।
नैतिकता के पाठ पढ़ाबी,
संस्कृत हो आचार ।।
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Wednesday, May 24, 2023
गामक भ्रमण
आइ गाममे पुबारीभागक जलपा कलम दिस प्रातःकालीन भ्रमण पर निकललहुँ । बाध दिस जमाना पर गेल छलहुँ । बाल्यकालक संस्मरण जाग्रत भ' उठल । ब्रह्मस्थान, खबासक पोखरि, ककरियाही, गजारी बाध आ जलपा कलम.... आदिक एक-एक बात ओहिना याद अछि ।
एखन जूरसितल 14-15 अप्रैल क' बीतल अछि, गाममे कोनो जीवंतता नहि बुझायल । पहिने जूरसितल दिन भोरे सँ चहल-पहल रहैत छल, जुड़ाब'बाली बुड़हीसब सुतले सँ जुड़बैत छलीह, ऐ बेर किछु नै बुझायल । पूर्वमे लोकसब चौकी, पलंग, खाट, केबार, खाट, सफरी, कुर्सी-टेबुल... सबके पोखरिमे डुबाक' ख़ूब नीकसँ साफ करैत छलाह । सब गाछक जड़िमे जल द' जुड़बैत छलाह, कियो-कियो किछु खानापूर्ति करैत बुझयलाह ।
तकर बादक तँ कोनो कार्यक्रमे ने देखलहुँ । गोबर-माटि-गदौस-थाल-कादो सबहक तँ कोनो नामे ने! ने युवावर्गक जोस आ ने उमंग, रस्ता सबहक सफाइयो नै भेल ।
दुपहरमे खबासक पोखरिमे दछिनबारि टोल आ उतरबारि टोलक बीच पाइन-पाइनक खेल होइत छल, प्रतिपक्षीके बिना हरदा बजेने नै छोड़ैत छल, सबहक आँखि लाल-लाल भ' जाइत छल ।
पाइन झोंकब प्रतियोगिताक बाद उतरबरिया भीरपर ब्रह्मबाबाक प्रांगणमे दुनू टोलक कुश्ती प्रतियोगिता होइत छल । तत्पश्चात् बेरूपहर लोक शिकार खेलाय जाइत छल । गामक उत्तरभाग तथा दक्षिणभागमे करपुर वा दोस्तपुर संगे फ्रेंडली ढेपाउज होइत छल । मुदा कहियो काल बेसी झगड़ा भ' जाइत छल । मुदा आब किछुओ नै होइत अछि ।
ओना एकटा बात तँ नीके भेल जे शिकार आ ढ़ेपाउज बन्द भ' गेल, जीव-जन्तुक हत्या पर प्रतिबंध तँ छैके तएँ ओकर अनुपालन करब अनिवार्य अछि । ढ़ेपाउज ततेक विभत्स रूप ल' लेने छल जे भाला, गणास, तीर सब चल' लागल छल आ लोकसब घायल होम' लागल छल । बेल्हबाड आ नाजिरपुरमे तँ भाला लगला सँ मरबाक दुर्घटनातक सुनने छलहुँ ।
हलाँकि गोबर-माटि, पाइन-पाइन, कुस्ती-कुस्ती... प्रतियोगितासबसँ जीवन्तता बुझाइत छल ।
आजुक धीया-पुतासबकें तँ ई बात सब खिस्सा-पिहानी आ असभ्यता जेकाँ बुझेतनि । मुदा जिनगीके नैराश्यसँ बचेबाकलेल, आपसमे स्नेह बढ़ेबाक लेल आ जीवन्तता बनल रहबाक लेल पाबनि-तिहारक क्रियाकलाप आवश्यक रहैछ । तकरा अभावमे शहरी स्वार्थपरता, एकाकीपन आ नैराश्य गामोमे पइस रहल अछि जे गामोसबके शहरे जेकाँ बना देत जत' लोकके बरखो-बर्खतक पड़ोसियोसँ परिचय नै रहैत छैक ।
ब्रह्मस्थानक चर्च आयल अछि । हमरा गामक ब्रह्म बहुत जाग्रत आ परोपकारी छलाह । भूत-प्रेतक प्रकोप, कोनो तरहक बेमारी, चोइर-डकैती.... इत्यादि सबहक निदान ब्रह्म क' दैत छलाह । साँझखनक' चौपारि पर परोपट्टाक फरियादीसबहक मेला लागल रहैत छल आ सबहक समस्याक निदान ब्रह्म करैत छलथिन्ह । लगभग चौसठि बर्खसँ खबासक पोखरिक उतरबरिया भीरपर अवस्थित ब्रह्मस्थानमे नवाह संकीर्णतन भ' रहल अछि ।
खबासक पोखरिक चर्च भेल अछि । ई पोखरि करमौलीग्राम निवासी राजक खबास(स्व0 लछुमन खबास)क खुनाओल छन्हि । राज दड़िभंगा द्वारा लछुमन खबासके 1100 बिग्घा डोकहर मौजे भेटल छलन्हि । करमौलीसँ डोकहर भगवतीस्थानधरि खबास अनका जमीन पर पएर नै दैत छलाह । खबासेक विशालकाय पोखरिमे जूरसितलक पाइन-पाइन होइत छल ।
ककरियाहीक चर्च भेल अछि । ई बड्ड गँहीर डबरा अछि । सम्पूर्ण गामक माटि-माँगर(उपनयनक चुलहा हेतु...) अहीक माटिसँ होइछ । सम्भवतः,जखन गाममे पोखरि नै छल हेतैक तँ यएह सबहक आश्रय छल हेतैक ।
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