Tuesday, December 10, 2019

ख़ालिए ऐठाम अएलहुँ

अएलहुँ खाली जैब खाली,
कथी लेल निशदिन मरै छी?
देखि पर अट्टालिका के
व्यर्थ मे सदिखन जरै छी ।।
व्यर्थ मे सदिखन जरै छी,
शीघ्र बाँटू सकल अरजन ।
गमन पूर्वहिं रिक्ति उत्तम,
मानसिक भौतिक सकल धन ।।
कएल पर उपकार किछुओ,
जन्म सार्थक तखन कएलहुँ ।
बिलहि मोटरी करू खाली,
ख़ालिए ऐठाम अएलहुँ ।।
*****10.12.2019*****

Thursday, November 21, 2019

कुजरनी


घर मे
कोनो तरकारी नहिं अछि,
आबि रहल छथि
जमाय-समधि,
भरमा बचाब’बाली
पहुँचि गेली I  

घूमि रहलि छथि
गामे-गाम
बाटे-घाटे
दरबज्जे-दरबज्जे
अंगने-अंगने,
माथ पर पथिया
कोर मे चिलका,
हरियर-हरियर तरकारी
ताजा-ताजा फल
अल्लू-पियाउज..
सब किछु I

कीनि लै छथि,
थोक मे
दू-चारि पथिया भरि
हात-बजार जाक’,
अगिला हाट तक के
वैह छथि आसरा I

कोनो भय नहिं
रौद-बरखाक
अन्हर-बिहाड़िक
कुकुर-बानरक...
गुंडा-मबालीक...!

निर्भीक
घूमि रहलि,
सब मर्द जीरो छथि
हुनकर निर्भीकताक आगू,

ग्रैंड सैल्यूट!!
हुनका श्रम के,
हुनका निर्भीकता के!!!
*****************


बाल्यकाल

हे बाल्यकाल! घुरि आउ हमर,
हे बाल्यकाल! घुरि आउ हमर ।।
नै रौद-बसातक भय कनियो,
बरखा-अछार-फानल-कूदल,
तितली पकड़क लेल दौड़-धूप,
दोस्तक सङ् मे हुड़दंग मचल ।
हे बाल्यकाल! घुरि आउ हमर,
हे बाल्यकाल..........।।
तुरतहिं झगड़ा आ प्रेम तुरत,
नै मोन मे कोनो बात टिकल,
किछुओ चिन्ता ने फिकिर कथुक,
मित्रक झुंडे छल स्वर्ग जकर ।
हे बाल्यकाल! घुरि आउ हमर,
हे.......।।
कबडी-कबडी आ टाइल-पुली,
लुक्का-छिप्पी गोटरस-गोटरस,
पोखरि-झाँखुर सौँसे रपटल,
गुड्डी-बाजी मे सतत रमल ।
हे बाल्यकाल! घुरि आउ हमर,
हे..........।।
ने बैर-द्वेष के नामो छल,
ने जाति-धर्म के भानो छल,
ने नीक-बेजायक ज्ञानो छल,
सब दोस्ते जग मे सगरो छल ।
हे बाल्यकाल ! घुरि आउ हमर,
हे.............।।
खिस्सा नानी-नानाक सूनि,
सपना के राजकुमार बनल,
मायक कोरा स्वर्गोपरि छल,
ओकरे सँ रूसब-बौंसब छल ।
हे बाल्यकाल! घुरि आउ हमर,
हे...............।।
लूडो-लूडो कैरम-गोटी,
गेंदक पाछू बेहाल रहल,
कागत के नौका मे डूबल,
खएबा-पीबा के सुधि बिसरल ।
हे बाल्यकाल! घुरि आउ हमर,
हे.........।।
बाड़िक-केरा-बड़हर-लताम,
खीरा नेबो पर सब लुधकल,
कतबो बाबी-काकी बाजलि,
सब आइन बिसरि कए टूटि पड़ल ।
हे बाल्यकाल! घुरि आउ हमर,
हे बाल्यकाल! घुरि आउ हमर !!!
*****कमलजी, 21.11.19*****

Monday, November 18, 2019

मल्हू




आइर-धूर पर बाधे-बोने
सगरो ओ छिछिआय रहल I
धीया-पूता बाट-बटोही
सब-क्यो छै ढेपियाय रहल II

मैल-कुचैल झुलंग गंजी पर
कुरता सौंसे छै फाटल I
धोती द’ढ़ कतहु नै लागय,
सौंसे छै चेफड़ी लागल II

चिड़इ-चुनमुनिक खोंता सनके
केस ओकर छै लागि रहल I
कारी कम्मल चेथड़ी-चेथड़ी,
कुकुरक ड’रे भागि रहल II

‘मल्हू’ नाम एकर क्यो कहलक,
बूझि पड़य साफे पागल I
लोक कहय ई सिद्ध, कतेको-
एकरा सेवा मे लागल II

क्यो कहलक बहुतो संतति-सुख,
एकरा आशीषें पौलक I
न’बे कुर्ता-धोती-तौनी-
डोपटा एकरा पहिरौलक I

चीर-चारिक’ सबटा कपड़ा,
ईंटा-पाथर फोड़ि रहल I
फे’रो औघर रूप बनाक’
सौंसे अछि ई दौड़ि रहल II
******19.11.19******


Saturday, October 26, 2019

दीपोत्सव 27.10.19


लेस लीय' दीप
सब अपना हृदय मे,
पड़ायत अज्ञान-तम
दिव्-ज्ञान जागत ।
भरि चुकल कीड़ा-
मकोड़ा लोभ-मोहक,
होइत देरी ज्योति
सबटा दूर भागत ।।
साफ अंदर-बाहरो
बाढ़नि चलाक',
वृद्धि प्रेमक, द्वेष-
घृणा के भगाक'
स्वयं जरिक' करू
दुनियाँ के प्रकाशित,
परहितक हो भाव
स्वार्थकता मेटाक' ।।
करू लक्ष्मी-गणेशक-
वाणीक पूजन,
वृद्धि-धन, निर्विघ्न-जिनगी,
ज्ञान-बाढ़त ।
शान्ति सुख समृद्धि
खुशहालीक जीवन,
दिव्य आलोकित हृदय,
अज्ञान जारत।। 
प्रदूषित नै करू
पर्यावरण कथमपि,
फटक्का के त्यागि,
घृत-तेले जराबी I
अगरबत्ती आ कपूरक-
सुरभि सबतरि,
हरित हो दीपावली
बारुद के त्यागी II

प्रसादी मिष्टान्न-फल-
लड्डू चढ़ायब,
खूब बाँटू, स्वयं
सब भोगो लगायब I
होयत वाणी मिट्ठ तँ
संसार भरि मे,
स्नेह-मैत्रीभाव के
सगरो बढ़ायब II
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Saturday, October 12, 2019

हमर कल्पनाक दुनियाँ



हमर अछि सपनाक दुनियाँ महा अद्भुत,
स्नेहमय वातावरण अछि शान्त सगरो I
प्रेम आ सौहार्द्र अछि सबहक हृदय मे,
दुख दरिद्रा करय ने आक्रान्त ककरो II

क्यो ने सपनहुँ मे सोचय अपकार अनकर,
भरल अछि उर मे करब उपकार सबहक I
सब सुखी हो सब नीरुज, अछि कामना ई,
सब सुरक्षित हो अशिक्षा मेटय सबहक II

नारि-नर सब महाज्ञानी हो जगत मे,
धर्मरत पुण्यातमा हो सब गुणग I
क्यो ने कपटी धूर्त भेटय जगत भरि मे,
अहंकारक लेश नहीं सब हो कृतग II

भरल हो औदार्य स्त्री-पुरुष सब मे,
मन वचन कर्में पतिव्रत धर्म नारिक I
सकल नर मे पराक्रम सब शूरमा हो,
पुरुष सबटा व्रती होमथि एक नारिक II

महा दुधगरि धेनु दुग्धक बहय सरिता,
सर सरित नलकूप सब हो भरल जल सँ I
वृक्ष सबटा बोन मे फल सँ लदल हो,
खेत सगरो लहलहाइत हो फसल सँ II
****कमलजी****12.10.19*****

Friday, October 11, 2019

वाणी वन्दना



ज्ञानदे माँ हंसवाहिनि
बुद्धि निर्मल दे I बुद्धि निर्मल दे II

विद्या बल विवेक अम्बे दे,
स्वाभिमान भर दे I स्वाभिमान भर दे II

सत्य स्नेह त्याग भर दे माँ,
महा पराक्रम दे I महा पराक्रम दे II

शील विनय साहस संयम दे,
लोभ मोह हर ले I लोभ मोह हर ले II

भूल से भी माँ न हमसे,
किसी का अपकार होबे,
धर्म के पथ पर चलें हम,
चित्त पावन दे II चित्त पावन दे II
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