Thursday, March 21, 2019

बुरा ने मानू होली अछि (21.03.2019, फगुआक अवसर पर )

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जोगीजी बाह जोगीजी !!!!
जुआनी मे मांस भकसल खूब जे
बुढ़ारी कंठीक नाटक से करै अछि ।
सगर जिनगी झूठ-खेती टा केलक जे
ढ़ोंग हरदम सत्त बाजक से करै अछि ।।
सा रा रा रा.......
जोगीजी बाह....
भूख सँ तड़पैत सबदिन जे रहय
एखन मेवा आर मिसरी नै पुछै अछि ।
ट्रेन-बस मे सभक पाकिट जे कटै छल
एखन नभ मार्गे सँ सबतरि से घुमै अछि ।।
सा रा रा रा.....
जोगीजी बाह...
भांग ताड़ी दारुए मे जे डुबल छल
नशाबंदी पर से भाषण द' रहल अछि ।
धूर्त ठक जे सतत ठकलक लोक सबके
शास्त्र पर से एखन प्रवचन द' रहल अछि ।।
सा रा रा रा.....
जोगीजी बाह...
सुखी जीवन लेल परिवारक नियोजन-
जे करेलक, भोट मे से गौण पड़ि गेल ।
दशाधिक संतान के जनमा चुकल जे
आइ नसबंदीक से सिरमौर बनि गेल ।।
सा रा रा रा...
जोगीजी बाह..
लंद-फंदे मे निरत लुच्चा आ लम्पट
सकल जिनगी जकर व्यभिचारी रहल अछि ।
करै छल चोरी छिनारी जे सतत
देशसेवक एखन सतचारी बनल अछि ।।
सा रा रा रा...
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Wednesday, January 9, 2019

मृत्यु


सरल जनमल, प्रतिष्ठा लेल-
कठिन रस्ता के चुनै छी,
नाम-यश लेल भेल व्याकुल
जाल माया के बुनै छी I

स्वयं बूनल जाल मे फँसि
दया के भिक्षा मंगै छी,
बनल जिनगी दीन-हीनक
मुक्ति के इक्षा करै छी I

जखन ऊर्जा देह मे, सब-
रहै अछि उन्मत्त मग मे,
समय बितने करय पश्चा-
ताप, अतिशय लोक जग मे I

मृत्यु तँ बस मुक्ति थिक
दुनियाँक मायाजाल सँ,
क्यो ने बाँचल रहत जग मे
महाकालक ब्याल सँ I

दान पुन विद्या ने तप हो
पशु सदृश जिनगी तकर अछि,
मरण तँ बस नाम लेल हो
ओ तँ पहिनहिं मरि चुकल अछि II







Wednesday, September 12, 2018

मड़ुआ-मसुरी

ओ कोनो
आन जुग छल हेतै,
पाबनि-तिहार आ
सब शुभ काज मे
मड़ुआ-मसुरी के
बारल जाइत छल हेतै,
आब त'
ओएह अनूप अछि,
कोनो पैघ चिन्तकक उक्ति
सत्य बुझाइछ-
"ई मुँह आ
मसुरीक दालि" !
आब त'
पाबनि-तिहारे मे
दुनूक दर्शन होइछ!!!!
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पूत ब्रह्मचारी

झिंगुरलालक बेटा
पड़ह' मे बड्ड तेज,
लगनशील ततेक जे
सदिखन किताब-कापी
हाथे मे रहै छलै,
कम्पिटीशन मे
औवल आयल ।

झिंगुरलाल
खेत-पथार बेचिक'
बेटा के
इंजीनियरिंग मे
नाम लिखेलक आ
दिकदारियो मे
पैंच-पालट क' क'
मासे-मासे बेटा के
पाइ पठबैछ आ
कोनो दिक्कत नै होम' दैछ ।

मुदा छौंड़ा के आब
हबा लागि गेलैक अछि,
शहरक
सब संगीक बाप-
शूट-बूट-टायबलाक सोंझा
गामक कृषक,
धोती-कुरता-अंगपोछाबला
अपना बाप के देखिक'
बड्ड लाज लगैत छैक,
छुट्टी मे गाम नै जाक'
पटने मे पित्तीक ओइठाँ
रहै अछि,
माय-बापके भेट कर'
नै जाइछ,
बापे पाइ-कौड़ी ल' क'
एत्तहि आबि जाइछ !

गाम मे
बाप सबहक ल'ग
बेटाक प्रशंसा करैत
नै थकैत अछि,
माय-बहिन
बाट तकिते रहि जाइछ,
मुदा छौंड़ा के देखू,
माय-बहिन के
नामो ने सुन' चाहैछ,
पिताक नाम
'झिंगुरलाल' लिख'/बाज' मे
मूरी गारि लैछ!!!
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Thursday, July 5, 2018

खोज


छात्र खोजथि ज्ञान सदिखन,                                                उचक्का “ फंटुसइ “ खोजथि I                                        मूर्ख के ठक, दुष्टगण-                                            अपकार आ ‘ दुष्टइ ‘ खोजथि II

सतत निर्जन खोजथि योगी,                                      दातृगण याचक के खोजथि I                                    
पुलिस अपराधी खोजै छथि,
भीतगण रक्षक के खोजथि II

बुभुक्षित के जान भोजन, 
तृषित जल विनु परम व्याकुल I
प्रिया प्रिय के बाट ताकथि,
माय शिशु विनु परम आकुल II

धनिक ग्राहकगण के गनिका,                           
दाम के लोभी खोजै छथि I                                        वैद के खोजैछ रोगी,                                              तत्त्व के ज्ञानी खोजै छथि II

Friday, May 11, 2018

दुःख



दुःख पर जँ
ध्यान देल जाय त’
पबै छी जे ई वास्तव मे
भौतिक, शैक्षणिक, आत्मिक
सब प्रकारक
उन्नतिक टेस्ट थिक I
जतेक व्यक्ति विश्व मे
नाम कमेलाह सब के
कठोरतम दुःख स’
गुजर’ पड़लनि आ
तखने ओ महानतम
बनि सकलाह I

राम, कृष्ण, बुद्ध, शंकराचार्य,
विवेकानंद...आदि जखन
दुखाग्नि मे तपलाह
तखनहिं असली
सोनाक रूप मे चमकलाह I
“ औरों का दुःख देखा तो
मैं अपना दुःख भूल गया I “
रामक चौदह वर्षक वनवास
हुनका पुरुषोत्तम बनेलक,
कृष्ण के त’ जन्मे
कारागार मे भेल छलनि,
बच्चे स’ तते
आफत-विपत अयलनि जे
हुनका ऑल राउंडर बना देलकनि
आ हुनका साक्षात् भगवान
मानल गेलनि-
‘ कृष्णस्तु भगवान् स्वयं ‘ I
भगवान बुद्ध
सबटा राजसी सुख त्यागलाह,
तैं दशावतार मे नवम्
अवतार बनलाह I
तही तरहें शंकराचार्य
आदिगुरू कहेलाह आ
विवेकानंद शिकागो धर्मसम्मेलन मे
एक गुलाम देश के विश्वगुरुक
पद पर प्रतिष्टित
क’ सकलाह I    

रे मन !
हुनका सबहक कष्ट के आगू त’
तोहर कष्ट किछु नै छौ,
तखन कियैक एते अधीर छैं,
धैर्य धर,
एक दिन बेरा
पार लगबे करतौ !!
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Thursday, May 3, 2018

कलियुगक उपकार हत्या बरोबरि



हमर पड़ोसी छथि
सुधाकर चौधरीजी,
बहुत सुहृदय,
बहुत परोपकारी,
ककरो कष्ट ओ
देखि नै सकै छथि,
तही दुआरे ओ
अनका उपकार करक खातिर
कतेको बेर कष्ट भोगलाह अछि I

एक बेरक बात अछि,
एकदिन अशोक राजपथ मे ओ
बाँसघाट स’ दीघा
जा रहल छलाह I
आगू मे देखै छथि जे
एकटा कार
बहुत तेजी स’
ओभरटेक केलक आ
आगाँ मे जा रहल
एकटा बाइक के खूब जोड़ स’
धक्का द’ पड़ा गेल I
बाइक के सबार
रस्ते पर खसि पडल,
सोनिते-सोनितामे !
जोड़-जोड़ स’
कुहरि रहल छल I
कोमल हृदय सुधाजी स’ नै
देखल गेलनि,
बगले मे कार रोकि
ओकरा उठा क’
अस्पताल पहुँचाबक
उद्देश्य स’
अपना कार मे
चढ़ाबक प्रयास कर’ लगलाह I
ताबते मे चारि-पाँच टा
लखेड़ा पाछुए स’ आबि
सुधाजी के लाठी-डंटा स’
तड़तड़ा दै छन्हि,
कतबो सफाइ देलखिन्ह
नै सुनलकन्हि,
कपारो फोडि देलकैन I

कुहड़ैत कहुना क’ उठलाह आ
उदास-मोन कार स्टार्ट क’ क’
विदा भेलाह,
कान पकड़ैत छथि जे
फेर आब ककरो
मदति नै करब I

एकरे कहै छै-
‘ कलियुगक उपकार ह्त्या बरोबरि ‘ !
चौधरीजी !
अहाँ निरास जुनि होइ,
अपनेक सबटा लेखा-जोखा
तेसर शक्ति क’ रहल अछि,
एकर प्रत्युपकार जरूर भेटत,
अहीं सब सन लोक पर
ई दुनिया टिकल अछि !!
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