कोजागरा (25.10.2026):-
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"पग-पग पोखरि, माछ, मखान;
सरस बोल, मुस्की मुख पान ॥
विद्या, वैभव, शांतिक धाम;
ई सब थिक मिथिलाक पहिचान ।।"
सब मित्र-बंधुकेँ मिथिलाक प्रख्यात लोकपर्व कोजागरा पाबनिक हार्दिक बधाइ आ शुभकामना !!
माता लक्ष्मी सँ कामना करैत छी जे सबगोटेकेँ समृद्धि आ सद्बुद्धि प्रदान करथि ।
"को जागर्ति"?? जे जागल रहत तकरे घर माता लक्ष्मीक आगमन होयत ।
हमसब तँ जिनगीक तीन भाग सुइतेक' बिताबैत छी । जगले रहब तखने सरस्वती/लक्ष्मी.... सब देवी देवता प्रसन्न रहि सकैत छथि आ अभीष्ट वर प्रदान क' सकैत छथि । मैथिल लोकनि पूर्वकालेसँ जागबाक महतु जानैत छलाह, तएँ दिग्दिगंतमे सरस्वतीक झंडा फहरयलाह । लक्ष्मीक महतु कम देलथिन्ह तेँ हुनकर कृपा कम प्राप्त भेलैन्ह ।
कोजागरा (कोजागरी पूर्णिमा) आश्विन मासक पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा)क दिन मनाओल जाइछ । मिथिलांचल आ पूर्वी भारतक अत्यंत महत्वपूर्ण आ प्रसिद्ध पावनि! एहि पावनिक धार्मिक, सांस्कृतिक आ सामाजिक रूप सँ बड़ पैघ महत्व!
एकर अर्थ, महत्व आ परंपरा विचारणीय :-
* "कोजागरा" शब्द संस्कृतक "को जागर्ति" (अर्थात्, के जागि रहल अछि?") सँ बनल अछि। पौराणिक मान्यताक अनुसार, एहि रातिमे धन आ समृद्धिक देवी माता लक्ष्मी स्वर्गसँ पृथ्वी पर आबि विचरण करैत पूछैत छथि जे "को जागर्ति?" (के जागल अछि?)। जे व्यक्ति एहि राति जागि कऽ माता लक्ष्मीक आराधना करैत अछि, ओकरापर माँ लक्ष्मीक विशेष कृपा होइत अछि आ हुनकर घर धन-धान्यसँ भरि जाइत अछि।
** धार्मिक आ सांस्कृतिक महत्व:-
• अमृत वर्षाक रात्रि :- मानल जाइत अछि जे शरद पूर्णिमाक राति चन्द्रमा अपन सभ १६ कलासँ पूर्ण होइत छथि आ हुनक रश्मिसँ धरती पर अमृत बरसैत अछि । कालिदासक पाँती "राजन! तव यशोभाति शरच्चन्द्रमरीचिवत्" सबके स्मरण होयत ।
• माता लक्ष्मीक पूजन:- एहि राति माँ लक्ष्मीक विशेष पूजा-अर्चनाकऽ रात्रि जागरण कएल जाइत अछि।
• स्वास्थ्यक दृष्टिसँ महत्व:- चन्द्रमाक रश्मिमे मखान, खीर वा दूध राखि बादमे प्रसाद रूपमे ग्रहण करब आरोग्य बढ़बैछ ।
*** मिथिलामे कोजागराक विशेष परंपरा (नवविवाहितक पावनि):-
मिथिलामे कोजागरा मात्र धार्मिक पावनि नहि, ई नवविवाहित दुल्हाक लेल एकटा पैघ उत्सव आ संस्कार थिक। जिनकर विवाह ओही वर्ष भेल रहैत अछि, हुनका घरमे कोजागरा बड़ धूमधामसँ मनाओल जाइत अछि:
• सासुरसँ भार (उपहार):- कोजागराक दिन दुलहिनक नैहरसँ दुलहाक घरपर भारी मात्रामे उपहार(भार) पठाओल जाइछ । एहि भारमे मखान, पान, सुपारी, तरह-तरहक मिष्टान्न (खाजा, लड्डू), दही, केरा आ दुलहा आ हुनकर परिवारक लेल वस्त्र शामिल रहैत अछि।
• दुलहाक चुमाओन:- एहि दिन संध्या काल नवविवाहित दुलहाके सुंदर वस्त्र आ पाग पहिराकऽ समाजक बुजुर्ग लोकनि द्वारा "चुमाओन" (पारंपरिक रूप सँ आशीर्वाद देब) कएल जाइत अछि।
• मखान आ पानक वितरण:- मिथिलामे मखान आ पानक पैघ महत्व अछि। कोजागराक राति दुलहा पक्षक लोक अपन गाम आ समाजक लोकके आमंत्रित करैत छथि आ सभके आदरपूर्वक पान, मखान आ बताशासँ स्वागत कएल जाइत अछि। मखानक स्वास्थ्यलेल अप्रतिम महतु अछि । पायस बनाक', भूजिक', तरकारी बनाक'... जेना मोन हो खाउ, एकदम स्वस्थ रहब ।
• कौड़ीक खेल:- रातिमे पूर्णिमाक इजोत (चाँदनी)मे दुलहा अपन सार,भाउज आ मित्र लोकनिक संग आँगनमे "कौड़ी भाँजिक' पचीसी" खेलाइत छथि । ई परंपरा आपसी प्रेम आ हँसी-मजाकके बढ़बैत अछि । पहिले तँ सबहक दरबज्जापर एक मास पहिलेसँ पचीसी होइत छल जे कोजागरा दिन समाप्त होइत छल ।
अर्थात् कोजागरा आपसी संबंधके मजगूत करबाक, नव दम्पतिकेँ आशीर्वाद देबाक आ माता लक्ष्मीक आगमनक उल्लास मनयबाक एकटा अनुपम महापर्व थिक ।
जय माँ लक्ष्मी! सबपर कृपा करू!!!
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