Kamalji
Sunday, May 24, 2026
हस्ती कहिमुकरी(2)
कृष्ण जलधर सदृश हरि नहि,
दीर्घकाय मुदा छी गिरि नहि ।
नाकसँ हम करी मस्ती,
की सखि केशव? नहि सखि हस्ती ।।
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